संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। भारत मंडपम में आयोजित भारत टेक्स 2026 के दूसरे दिन झारखंड पवेलियन आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना रहा। देश-विदेश से आए खरीदार, फैशन डिजाइनर और उद्योग प्रतिनिधि राज्य की पारंपरिक हस्तकरघा विरासत को करीब से देखने पहुंचे। तसर सिल्क की प्राकृतिक चमक, भगैया साड़ी की हस्तनिर्मित बुनाई और दुमका चादर की सादगी ने आगंतुकों को खासा प्रभावित किया। विदेशी खरीदारों ने उत्पादों की निर्माण प्रक्रिया और वैश्विक बाजार में उनकी संभावनाओं की जानकारी भी ली।
पवेलियन में झारखंड के छह जीआई (भौगोलिक संकेतक) टैग प्राप्त उत्पाद-तसर सिल्क, कुचाई सिल्क, भगैया साड़ी एवं फैब्रिक, दुमका चादर, भोया साड़ी एवं फैब्रिक तथा पांची साड़ी एवं फैब्रिक प्रदर्शित किए गए हैं। इनके माध्यम से राज्य की पारंपरिक बुनाई, जनजातीय कला और स्थानीय कारीगरों के कौशल को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया जा रहा है।
आगंतुकों ने उत्पादों की गुणवत्ता, प्राकृतिक रंगों और पारंपरिक डिजाइनों की सराहना की। कई निर्यातकों और उद्योग प्रतिनिधियों ने इन्हें वैश्विक बाजार तक पहुंचाने में रुचि दिखाई, जिससे स्थानीय बुनकरों और कारीगरों के लिए नए व्यावसायिक अवसरों की उम्मीद बढ़ी है। तसर और कुचाई सिल्क के साथ साहिबगंज की भगैया साड़ी तथा संताल परगना की दुमका, भोया और पांची साड़ियां झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की पहचान बनकर उभरी हैं।