धनतेरस के मौके पर गुरुवार को आभूषण की ज्यादातर दुकानें खाली दिखीं। बीते वर्षों में जहां धनतेरस के मौके पर शहर के नामी-गिरामी ज्वेलरी विक्रेताओं के यहां भीड़ लगी रहती थी, इस साल गिनती के लोग आभूषण की खरीदारी करने पहुंचे।
करोल बाग में जाने-माने ज्वेलरी प्रतिष्ठान के मालिक प्रशांत सोनी ने बताया कि यदि पिछले 2 महीने की बात करें तो मौजूदा समय सोना लगभग 2000 रुपया प्रति ग्राम सस्ता हुआ है। लेकिन पिछले साल धनतेरस के हिसाब से देखें तो सोने की कीमत लगभग 10 प्रतिशत अभी भी ज्यादा है।
प्रशांत ने बताया कि इस बार धनतेरस गुरुवार और शुक्रवार दोनों दिन है। बृहस्पतिवार को शाम 5 बजे से धनतेरस पर्व लग गया है। उम्मीद थी कि गुरुवार को भी लोग आभूषण खरीदने आएंगे। लेकिन शाम तक उम्मीद के मुताबिक लोग नहीं पहुंचे। उन्होंने बताया कि जो लोग खरीदारी करने आए भी वह आभूषण खरीदने में दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं। ज्यादातर लोगों ने चांदी और सोने के लक्ष्मी गणेश की छपाई वाले सिक्के की खरीदारी ही की है। सुबह से लेकर शाम तक गिनती के 50 लोग ही खरीदारी करने पहुंचे होंगे। उन्होंने उम्मीद जताई है कि शायद शुक्रवार को लोग आभूषण की खरीदारी करने के लिए घर से निकलें।
ज्वेलरी के लिए सुप्रसिद्ध गफ्फार मार्केट के नामी-गिरामी आभूषण विक्रेता आरके शर्मा ने बताया कि इस साल धनतेरस पर उनके पास ना के बराबर आभूषण निर्माण के आर्डर हैं। उन्हें इस बात का अंदाजा है कि इस साल ज्यादातर लोगों की जेब खाली है। इसलिए धनतेरस के लिए बनाए ज्यादातर आभूषणों का वजन उन्होंने हल्का करा दिया है। ताकि लोगों को कम बजट में उनकी पसंद का आभूषण उपलब्ध कराया जा सके। इस साल धनतेरस पर ग्राहकों के लिए कई खास आभूषणों के डिजाइन सेट जैसे कि अजवा, इनायत, मिरोसा उन्होंने तैयार कराया है। जिनके सोने से ज्यादा डायमंड से निर्मित सेट लोग अधिक पसंद कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि सोने के सेट डायमंड के अपेक्षा ज्यादा महंगे हैं।
आरके शर्मा ने बताया कि उम्मीद है शुक्रवार को लोग आभूषणों की खरीदारी करेंगे। शनिवार को अपेक्षाकृत कम लोग ही खरीदारी करने आए। कोविड-19 महामारी की वजह से ग्राहक निराश हैं। धनतेरस के मौके पर लोग शादी विवाह के लिए भी आभूषणों की खरीदारी करते थे, लेकिन इस साल ऐसा नहीं है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले साल मार्च तक शादी विवाह का सीजन शुरू होगा तो आभूषणों की खरीदारी में भी इजाफा होगा।
बरतन बाजार की दुकानों में भी रहा सन्नाटा
करोल बाग के ठठेरी बाजार में सड़कों पर तो लोग घूमते दिखाई दिए। लेकिन बर्तनों की दुकानें खाली पड़ी हुई थीं। धनतेरस के मौके पर दुकानें खाली रहने पर दुकानदार मायूस थे। बर्तन विक्रेता अखिलेश कुमार ने कहा कि ऐसा कभी नहीं होता था। पहली बार कोविड-19 की वजह से ऐसा हुआ है कि ग्राहकों का रास्ता देखना पड़ रहा है। हालांकि उन्होंने उम्मीद जताई है कि बृहस्पतिवार को शायद कम लोगों ने धनतेरस माना है। उम्मीद है शुक्रवार को लोग खरीदारी करने आएंगे।