गाजियाबाद जिले में जनसुविधा केंद्रों पर उगाही का खुला खेल चल रहा है। केंद्रों पर आधार कार्ड से लेकर पहचान पत्र बनवाने की सौदेबाजी कर मोटी रकम वसूली जा रही है। शासन का निर्देश है कि जनसुविधा केंद्र किसी भी तरह का आवेदन फॉर्म भरने के लिए ग्राहक से सिर्फ 15 रुपये (प्रति आवेदन) ही लिया जा सकता है, लेकिन यहां पर उससे आगे का काम चल रहा है।
आवेदन के बाद प्रमाण पत्र, आधार, पहचान पत्र आदि बनवाने का दबाव कर 500 रुपये तक ले लिए जाते हैं। बुधवार को अमर उजाला टीम ने स्टिंग ऑपरेशन किया तो जनसुविधा केंद्र संचालक साफ तौर पर सौदेबाजी करते हुए कैमरे में कैद हुए। यहां तक कि निर्धारित शुल्क पर कोई भी आवेदन फॉर्म ऑनलाइन भरने को तैयार नहीं हुआ।
नियम के अनुसार आधार कार्ड निशुल्क बनाया जा रहा है और मतदाता पहचान पत्र के लिए 10 रुपये (आवेदन शुल्क के अतिरिक्त) लिए जा सकते हैं। मगर उसकी रसीद भी देनी होगी। आधार कार्ड बनवाने का अधिकार भी केंद्रों को नहीं है, लेकिन सेटिंग के खेल में सौदा कर रहे हैं।
इतना ही नहीं आधार कार्ड में नाम, पता एवं जन्मतिथि संशोधन से लेकर फोटो बदलने तक के 450 रुपये लिए जा रहे हैं। जबकि सरकारी शुल्क पहचान संशोधन के 50 रुपये व बायोमीट्रिक संशोधन के 100 रुपये हैं। स्टिंग में सामने आया कि कुछ बैंक में मशीन खराब बताकर पिछले दरवाजे से आधार कार्ड बनवाने का काम हो रहा है।
जन सुविधा केंद्रों से सेटिंग कर आधार कार्ड बनाए जा रहे हैं। आमतौर पर आधार के लिए एक-एक महीने की वेटिंग चल रही है। अधिकतर बैंकों में एक ही दिन में महीने भर के टोकन बांट दिए जाते हैं। यह वजह है कि आम लोग जनसुविधा केंद्रों पर मोटी रकम चुकाकर आधार बनवा रहे हैं।
केस-1 मालीवाड़ा (जनसुविधा केंद्र)
रिपोर्टर : भैया पहचान पत्र बनवाना है।
केंद्र कर्मी : यह तो बीएलओ बनाएगा, हम नहीं बना सकते हैं।
रिपोर्टर: भैया आधार कार्ड कैसे बनेगा?
केंद्र कर्मी: आधार कार्ड बन जाएगा, 500 रुपये लेता है। मेरी मशीन बंद है, दूसरी मशीन चल रही है, वहां बनवा दूंगा।
रिपोर्टर : 500 रुपये तो बहुत महंगे हो गए?
केंद्र कर्मी : हां बहुत महंगे हो गए हैं।
रिपोर्टर : सरकारी रेट तो कम है?
केंद्र कर्मी : हां, सरकारी रेट तो फ्री है। बैंकों में मशीन चालू नहीं है। बैंक में तो आधार कार्ड फ्री में बन जाएगा।
रिपोर्टर: प्राइवेट में इतना महंगा क्यों?
केंद्र कर्मी : प्राइवेट नहीं, जुगाड़ से चालू होती है मशीन। पैसा जाता है इसका मोटा। कोई भी मशीन चालू नहीं है बैंक में। सबसे बड़ी यही दिक्कत है।
रिपोर्टर : तो प्राइवेट वाले कैसे सेटिंग कर लेते हैं?
केंद्र कर्मी : कर रखी होगी भैया, इतना तो मैं भी नहीं जानता।
रिपोर्टर : 500 रुपये से कम नहीं होगा क्या?
केंद्र कर्मी : नहीं, दो घंटे में नंबर आता है।
रिपोर्टर: तो आप भी नहीं बनाते हैं क्या?
केंद्र कर्मी : नहीं मेरी मशीन तो बंद पड़ी है। बहुतों की मशीन बंद पड़ी है।
रिपोर्टर : यह तो इमरजेंसी वाली व्यवस्था है?
केंद्र कर्मी : इमरजेंसी वाली कोई व्यवस्था नहीं है। दो साल तो मुझे देखते हुए हो गए। यही रेट चल रहा है। 2200 रुपये में पीछा छूटा है मेरे यहां एक आदमी का।
रिपोर्टर : 2200 रुपये में, इतना कैसे?
केंद्र कर्मी : सब कुछ गलत था उसका।
रिपोर्टर: कितने दिन में आ जाएगा आधार कार्ड?
केंद्र कर्मी : 15 दिन में बनकर आ जाता है नया।