दूध, दही, शहद, घी, फलों के रस व पुष्प से भगवान का अभिषेक किया जाएगा। भगवान को 108 प्रकार व्यंजन अर्पित किए जाएंगे। इस्कॉन मंदिर में दर्शन गुरुवार को प्रात: 4:30 बजे से रात 12 बजे तक होंगे। इस वर्ष इस उत्सव में देश-विदेश से पांच लाख भक्तों के सम्मिलित होने की आशा है। इसके अलावा शहर के अन्य मंदिरों में भी जन्मोत्सव की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं।
विदेशी और वृंदावन के फूलों से सजावट
इस्कॉन में पूरे मंदिर को फूलों व अन्य साज-सज्जा से सामान से सजाया जा रहा है। महिलाएं भगवान के शृंगार के लिए फूल माला बनाने में लगी हुई हैं। इसके लिए वृंदावन से फूल आए हैं। इसके अतिरिक्त विदेशों से विभिन्न प्रकार के रंग बिरंगे फूलों का भी प्रयोग किया जाएगा। मंदिर से जुड़ी महिला भक्त भगवान के भोग के लिए देशी और विदेशी 256 प्रकार के विभिन्न व्यंजन बनाने में जुटी हुई हैं।
भगवान कृष्ण का प्राकट्य रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इसलिए जन्माष्टमी के निर्धारण में रोहिणी नक्षत्र का भी ध्यान रखते हैं। इस बार भाद्रपद कृष्ण अष्टमी बुधवार दोपहर 3.38 आरंभ होगी और इसका समापन बृस्पतिवार शाम 4.14 बजे तक होगा। इस दौरान रोहिणी नक्षत्र पूरी रात्रि रहेगा। -ज्योतिषी पं प्रकाश जोशी