बात 2000-2001 की है। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजेपयी को लाल कृष्ण आडवाणी के साथ गांधी नगर के अक्षरधाम मंदिर आना था। दोनों नेताओं को प्रमुख स्वामी जी महाराज से मुलाकात करनी थी। स्वामी जी ने मुझे अगवानी करने का आदेश दिया था।
वाजपेयी तय समय पर आ गए। आडवाणी के पहुंचने में थोड़ी देर हुई। मैंने वाजपेयी से स्वामीजी के पास बार-बार चलने की गुजारिश की। लेकिन वह मुस्कुराकर यही कहते रहे कि स्वामी प्रमुख आडवाणी जी के गुरू हैं। उनके बगैर मैं उनके गुरू के पास नहीं जा सकता।
प्रधानमंत्री रहते हुए भी उन्होंने 15-20 मिनट गेट पर ही इंतजार किया। इस बीच वह मुझसे दूसरी बातें करते रहे। दूसरा वाकया 1999 का है। संसदीय चुनाव से पहले वाजपेयी ने प्रमुख स्वामीजी से मिलने की इच्छा जाहिर की।
मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उस वक्त भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव थे। वाजपेयी ने मोदी जी से इसकी व्यवस्था करने को कहा। लेकिन स्वामी प्रमुख उस वक्त इस्राइल में थे। लिहाजा मुलाकात संभव नहीं लग रही थी।