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पीएम रहते हुए भी गेट पर किया इंतजार, कहा-आडवाणी जी को आने दो, तभी स्वामीजी के पास चलूंगा

Fri, 17 Aug 2018 10:34 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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फाइल फोटो
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बात 2000-2001 की है। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजेपयी को लाल कृष्ण आडवाणी के साथ गांधी नगर के अक्षरधाम मंदिर आना था। दोनों नेताओं को प्रमुख स्वामी जी महाराज से मुलाकात करनी थी। स्वामी जी ने मुझे अगवानी करने का आदेश दिया था।

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वाजपेयी  तय समय पर आ गए। आडवाणी  के पहुंचने में थोड़ी देर हुई। मैंने वाजपेयी से स्वामीजी के पास बार-बार चलने की गुजारिश की। लेकिन वह मुस्कुराकर यही कहते रहे कि स्वामी प्रमुख आडवाणी जी के गुरू हैं। उनके बगैर मैं उनके गुरू के पास नहीं जा सकता।

प्रधानमंत्री रहते हुए भी उन्होंने 15-20 मिनट गेट पर ही इंतजार किया। इस बीच वह मुझसे दूसरी बातें करते रहे। दूसरा वाकया 1999 का है। संसदीय चुनाव से पहले वाजपेयी ने प्रमुख स्वामीजी से मिलने की इच्छा जाहिर की।
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मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उस वक्त भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव थे। वाजपेयी ने मोदी जी से इसकी व्यवस्था करने को कहा। लेकिन स्वामी प्रमुख उस वक्त इस्राइल में थे। लिहाजा मुलाकात संभव नहीं लग रही थी।

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इसी दौरान पता चला कि बृजेश मिश्र इस्राइल में ही हैं। वाजपेयी जी ने बृजेश मिश्र से स्वामी जी के पास जाने को कहा। वे वहां गए और प्रमुख स्वामी जी की बात वाजपेयी से करवाई।   
    
प्रमुख स्वाजी अक्सर कहा करते थे कि वाजपेयी सच्चे दिल से राष्ट्रसेवा कर रहे हैं। वह देश के समर्पित पुत्र हैं। ऐसे में उनका चिरकाल तक यश रहेगा। प्रमुख स्वामी जी और वाजपेयी जी का दिली रिश्ता ताउम्र कायम रहा। दोनों में एक-दूसरे के प्रति गहरा अनुराग था। देश का ही नहीं, निजी तौर पर भी हमने अपना बहुत कुछ खोया है।  
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