यह पूरा हादसा 10-15 मिनट के बीच हुआ, जब ट्रेन रुकी हुई थी। यात्री ने आगे लिखा कि सबसे बड़ी बात तो ये थी कि इस पूरी घटना के दौरान न तो कोई स्टाफ और न ही सुरक्षा बल मौके पर मौजूद थे। घटना के बाद हमने अटेंडेंट और टीटी को ढूंढने की कोशिश की जो 20 मिनट बाद मिले। अटेंडेंट अपनी जगह पर मौजूद नहीं था और ट्रेन में ही कहीं सो रहा था।
हमने टीटी को ढूंढने की कोशिश की लेकिन जब तक हम स्टेशन पर थे वह नहीं मिला। हमने 100 नंबर पर फोन किया और जब ट्रेन अपने गंतव्य पर पहुंची तो दिल्ली पुलिस उस स्टेशन पर पहुंची हुई थी। उन्होंने घटना की एफआईआर दर्ज की। अब इस दुर्घटना के लिए कौन जिम्मेदार है? हम ट्रेन की सुविधाओं के लिए ज्यादा पैसे देते हैं और क्या यही वो सुविधाएं हैं जो हमें पैसे के बदले मिल रही हैं।
अटेंडेंट ने हमें बताया कि ट्रेन में कोई सुरक्षा बल मौजूद नहीं था। क्या रेलवे किसी हादसे का इंतजार कर रही है जिसके बाद ट्रेनों में सुरक्षा मुहैया कराई जाएगी। हम एसी कोच में सुरक्षित नहीं तो कल्पना कीजिए कि स्लीपर कोच और जनरल क्लास की सिक्योरिटी का क्या आलम होगा, जहां लोग बिना टिकट के भी यात्रा कर लेते हैं। आखिर किस लिए रेलवे हमसे महंगा किराया वसूल कर रही है? हम ट्रेन में यात्रियों की सुरक्षा के लिए बहुत चिंतित हैं।