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जामिया हिंसाः हाईकोर्ट ने पुलिस से पूछा, क्या आपने हॉस्टल में घुसकर छात्रों को पीटने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की?

Sat, 19 Sep 2020 01:28 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
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जामिया हिंसा की तस्वीर (फाइल फोटो) - फोटो : सोशल मीडिया
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दिल्ली हाईकोर्ट ने शु्क्रवार को एक केस की सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है कि उसने अपने उन अफसरों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जिन्होंने पिछले वर्ष दिसंबर में  जामिया मिल्लिया इस्लामिया के बच्चों पर बल का प्रयोग किया।

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जामिया हिंसा पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए जस्टिस डीएन पटेल और जस्टिस प्रतीक जालान की पीठ ने कहा कि रिपोर्ट से पता चलता है कि पुलिस ने विश्वविद्यालय में घुसकर हिंसा की और अब तक उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

पीठ ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) अमन लेखी जो दिल्ली पुलिस का प्रतिनिधित्व कर रहे थे, से पूछा क्या आरोपी पुलिसवालों के खिलाफ कोई एफआईआर की गई है। लेखी ने जानकारी दी कि जांच इंडीविजुअल मामलों में चल रही है, जहां कुछ पुलिसवालों ने अतिरिक्त बल का प्रयोग किया। हालांकि एनएचआरसी की रिपोर्ट कहती है कि पुलिस का ने इसमें दखल दिया।
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इस पर अदालत ने कहा, लेकिन आपको हमें उचित जवाब देना होगा कि उन इंडीविजुअल मामलों में भी आपने क्या कार्रवाई की? क्या उन पुलिसवालों के खिलाफ कोई एफआईआर रजिस्टर की गई? कोर्ट ने यह बातें जामिया हिंसा मामले में रियायत की मांग देने वाली कई याचिकाओं की सुनवाई करते हुए कही। इन याचिकाओं में हिंसा की जांच के लिए एसआईटी गठित करने की भी मांग की गई जिसकी निगरानी अदालत करे।

एसजी लेखी ने पुलिस की कार्रवाई को यह कहते हुए सही ठहराया कि विश्वविद्यालय के अंदर से पुलिस पर पथराव हो रहा था। उन्होंने कहा कि भीड़ ने संपत्ति नष्ट करते हुए सड़क को ब्लॉक करना शुरू कर दिया था।

इस पर पीठ ने कहा, 'यहां यह बहस नहीं है कि आपके पास विश्वविद्यालय में घुसने का अधिकार है कि नहीं। यहां मुद्दा ये है कि क्या आपने कैंपस में घुसने से पहले विश्वविद्यालय प्रशासन की अनुमति ली थी।'

गौरतलब है कि सीएए के विरोध में छात्रों के प्रदर्शन के बाद जामिया कैंपस में हिंसा हुई थी। पुलिस पर आरोप है कि 15 दिसंबर 2019 को वह जामिया कैंपस में घुसी और बच्चों की पिटाई की। उस दिन जामिया के आसपास के इलाकों में प्रदर्शनकारियों ने कम से कम 10 गाड़ियों आग लगा दी। जामिया के छात्र कह चुके हैं कि वह हिंसा में शामिल नहीं थे और उनका शांतिपूर्ण मार्च बाहरी लोगों द्वारा कब्जा लिया गया।

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