उसने यहां पर असम के भारत से अलग होने की बात भी कही थी। इसके बाद शाहीनबाग से भारी संख्या में प्रदर्शनकारी जामिया नगर आए थे और वहां दंगे शुरू हो गए। हालांकि शरजील दंगों के समय जामिया नगर में नहीं आया था।
वह शाहीनबाग में ही रहा था। रात करीब 11 बजे वह जेएनयू चला गया था। एसआईटी के अधिकारियों के अनुसार जामिया नगर व शाहीनबाग में भाषण देने के लिए शरजील को किसी ने नहीं बुलाया था।
वह खुद ही भाषण देने जाता था और भाषण भी खुद ही तैयार करता था। लोगों को बताता था कि वह जेएनयू का छात्र है और उसने पीएचडी कर रखी है। लोग इसकी बातें सुनकर प्रभावित हो जाते थे। इसके बाद वह भाषण देने मंच पर चढ़ जाता था।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार शरजील ने सीएए के विरोध में जामिया नगर व शाहीनबाग में मजिस्दों के पास में उकसाने वाले पोस्टर बांटे थे। एसआईटी ने उससे पोस्टर व पम्फलेट बरामद किए थे।