गुलाबी नगरी के नाम से मशहूर जयपुर एक बढ़िया वीकेंड डेस्टिनेशन हो सकता है। दिल्ली से 260 किमी दूर जयपुर आप अपनी चमचमाती कार से महज 6 घंटे में पहुंच सकते हैं। रोडवेज बस और भारतीय रेल भी 6 घंटे से 8 घंटे के बीच में आपको जयपुर पहुंचा देंगी। ग्रेटर नोएडा की प्लानिंग की तारीफ करने वालों को पता होना चाहिए कि जयपुर देश का पहला प्लानड शहर है। यह शहर दिल्ली और आगरा के त्रिकोण को पूरा करने वाला शहर है।
शहर में घूमने के लिए टैक्सी के अलावा राजस्थान रोडवेज की बस, प्राइवेट बस और ऑटो रिक्शा भी सुलभ जरिया हो सकते हैं। आमेर का किला, जंतर मंतर, हवा महल, सेंट्रल म्यूजियम और नाहरगढ़ का किला देखने के लिए सरकार की ओर से टिकट एक साथ लिया जा सकता है। जिसकी कीमत 50 रुपये होती है। यह टिकट दो दिनों के लिए मान्य होता है।
क्या क्या देखें
आमेर का किला
इस किले की खूबसूरती आपको अपने पास बुलाएगी। वहीं इसके अंदर का शीश महल आपके दिमाग में एक नई छवि बनाएगी। इस किले में जाने के लिए हाथी की सवारी भी मौजूद है।
जयगढ़ का किला
आमेर का किला से एक किमी दूर जयगढ़ के किले की खासियत है इसमें मौजूद, तोप। यह तोप विश्व का सबसे बड़ा तोप है। बताया जाता है कि इससे केवल एक बार ही गोला दागा गया था जो 35 किमी दूर जाकर गिरा था। इसके उपर से दृश्य है, उसे शब्दों में बताना मुश्किल है। वह केवल अनुभव करने की चीज है।
नाहरगढ़ का किला
यह किला इन तीनों में सबसे छोटा किला है। इसी किले में फिल्म रंग दे बसंती के सीन को शूट किया गया है। फिल्म के गाना, पाठशाला की भी शूटिंग इसी किले में हुई थी।
जल महल
मान सागर झील के बीचों बीच बने इस महल की खूबसूरती बेजोड़ है। राजपूत शैली में निर्मित इस जल महल को आमेर का किला से देखने पर इसकी शैली को अच्छे से समझा जा सकता है।
हवामहल
महाराजा सवाई सिंह ने हवा महल का निर्माण 1799 में करवाया था। इसका निर्माण उस वक्त में महिलाओं के झरोखे के रूप में किया गया था। हवामहल में 950 खिड़कियां हैं, जिससे उस समय रानियां शहर के दिन प्रतिदिन की गतिविधि को अपना मन बहलाती थी।
इसके अलावा जंतर मंतर, अनोखी म्यूजियम, ईश्वरी मीनार, लक्ष्मी नारायण मंदिर भी देखे जा सकते हैं।