मुंबई में जैन धर्म के पर्व पयुर्शण के चलते बीफ और मीट पर प्रतिबंध लगाने के महानगर पालिका के फैसले पर विवाद खड़ा हो गया है। जैन मुनि तरुण सागर महाराज ने भी इस मामले पर टिप्पणी की है।
जैन मुनि ने अपने बयान में कहा है कि शिवसेना अपनी राजनीति करे और जैनियों को धर्म नीति न सिखाए। जैन धर्म की अहिंसा पर कटाक्ष न करे। जैन मुनि इन दिनों फरीदाबाद में चतुर्मास प्रवास पर हैं।
उन्होंने कहा कि जैन धर्म के पर्व पयुर्शण के दौरान मीट की बिक्री पर रोक की मांग करना क्या गुनाह है? अगर जैन समुदाय ने मांग की और सरकार ने उसे सुना तो किसी को चिल्ला-चोट करने की क्या जरूरत है।
यह तो सुप्रीम कोर्ट का वर्शों पुराना आदेश रहा है। मुगलकाल में भी जैनियों के पयुर्शण के दौरान किसी भी किस्म की कुर्बानी न करने का शाही फरमान हुआ करता था। जैन मुनि ने कहा कि मारने वाले से बचाने वाला हमेशा बड़ा होता है।
सब जीवों पर दया करो, जिओ और जीने दो, कोई मुझे बताए इस दर्शन में क्या गलत है। याद रखना चाहिए कि जिन्हें दूसरो पर दया नहीं आती उन्हें प्रकृति दया का पात्र बना देती है।