यूपी में हिंदू युवा वाहिनी संगठन की योगी आदित्यनाथ ने साल-2002 में रामनवमी के दिन स्थापना की थी। कुछ दिन पहले तक संगठन के पदाधिकारी सक्रिय नहीं थे, लेकिन जैसे ही आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने तो अचानक से युवा वाहिनी के पदाधिकारी और कार्यकर्ता सक्रिय हो गए।
सीएम बनने के बाद कुछ जिलों में संगठन के कार्यकर्ताओं की शिकायतें भी मिलीं। इस पर योगी ने संगठन के बडे़ पदाधिकारियों से कहा कि वह हर जिले में जाएं औैर पदाधिकारियों और कर्मचारियों को संयमित रहने के निर्देश दें। इस मुद्दे को लेकर अमर उजाला ने हिंदू युवा वाहिनी संगठन के संभाग प्रभारी प्रो. नागेंद्र प्रताप तोमर से बातचीत की।
उन्होंने बताया कि हिंदू युवा वाहिनी का गठन योगी आदित्यनाथ द्वारा जातिवाद को समाप्त करने के लिए किया गया था, ताकि जाति भूलकर लोग हिंदुत्व पर कायम रह सकें। जब तक सभी जाति के लोग हिंदुत्व की भावना से प्रेरित नहीं होंगे तब तक देश विकास नहीं कर पाएगा। योगी ने जातिवाद को कैंसर का नाम दिया है जो देश को खत्म कर देगा।
तोमर बताते हैं कि मेरठ और सहारनपुर के दोनों मंडलों की जिम्मेदारी उनके पास है। हाल ही में मुख्यमंत्री ने उन्हें निर्देश दिए हैं कि वह प्रत्येक जिले में जाएं और वहां पर पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं को कार्यशैली के बारे में बताएं, चूंकि अभी तक हिंदु युवा वाहिनी संगठन विपक्ष में था, लेकिन अब पक्ष में आ गया है।
इसलिए किसी भी कार्यकर्ता द्वारा अभद्रता नहीं की जाए। उन्होंने बताया कि संगठन के कुछ लोग निष्क्रिय हो गए थे जो अब सक्रिय हो गए हैं। सबसे पहले प्राथमिकता पुराने कार्यकर्ताओं को दी जाएगी और दूसरे नंबर पर निष्क्रिय पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता होगी।