हरियाणा में आईटी सेक्टर का एकमात्र हब साइबर सिटी है। पिछले एक दशक से इसका हाल बेहाल है, लेकिन अब हरियाणा सरकार इसे संजीवनी देने की योजना बना चुकी है।
प्रदेश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में इस सेक्टर का 10 फीसदी योगदान है। यही नहीं यह सेक्टर प्रदेश के कुल निर्यात में अकेले 54 फीसदी की भागीदारी निभाता है।
साथ ही साथ यह प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से 10 लाख लोगों को रोजगार मुहैया कराता है। ऐसी स्थिति में सरकार अपनी आईटी एंड ईएसडीएम पॉलिसी 2017 को और धारदार बनाने जा रही है। यह पॉलिसी इस माह में जारी कर दी जाएगी।
प्रदेश में मनोहर लाल के नेतृत्व में जब से भाजपा की नई सरकार बनी है, तभी से आईटी-आईटीईएस सेक्टर को बेहतर करने की उम्मीद थी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
इसी का नतीजा है कि बड़ी संख्या में कंपनियों ने अपने विस्तार की योजना को स्थगित कर दिया और उत्तर प्रदेश के नोएडा सहित अन्य राज्यों की ओर आकर्षित होने लगी हैं। प्रदेश सरकार की नई आईटी पॉलिसी का मकसद कंपनियों में पलायन की मानसिकता को रोकना है। इसके लिए कई घोषणाएं की गई हैं।
हर्वा बीपीओ के सीईओ अजय चतुर्वेदी का कहना है कि इस पॉलिसी को जल्द से जल्द जारी करना चाहिए। जिससे विश्वास बहाली हो सके और कंपनियों को पता चल सके कि वास्तव में सरकार उनके लिए क्या सोच रही है।
गुरुग्राम में दुनिया भर की 450 आईटी-आईटीईएस कंपनियां हैं। जिसमें चार हजार विदेशी प्रोफेशनल काम करते हैं। वहीं, देश भर के बीपीओ सेक्टर में काम करने वाले 13 फीसदी अकेले गुरुग्राम में हैं।
प्रदेश सरकार की नई आईटी पॉलिसी के तहत इस कंपनियों को हुडा, एचएसआईआईडीसी, सेज व आईटी पार्क में जमीन को पहले एक साल तक उसके कुल रेट का पांच फीसदी ही लिया जाएगा।
यह जमीन उन्हें 33 साल की लीज पर दी जाएगी। अभी तक महंगी जमीन ही इस सेक्टर के विस्तार में सबसे बड़ी बाधा है।