इसी तरह से अगर आम आदमी पार्टी चुनाव जीतती है तो उनका अगला बड़ा लक्ष्य देश की राजनीति के केंद्र में आने का होगा। पिछले चुनावों के बाद आप ने जिस तरह से पंजाब में सक्रिय राजनीति कर अपना कद बढ़ाने की कोशिश की थी, उसी तरह से इस बार वह बिहार और पश्चिम बंगाल की ओर रुख करके अपनी पैठ बनाने की जुगत करेंगे। अगर चुनाव के परिणाम आप के पक्ष में न हुए तो पार्टी का पूरा अस्तित्व ही दांव पर लग जाएगा।
रही बात कांग्रेस की तो यह बात कांग्रेस के हर छोटे बड़े नेता को पता है कि उनके पास इस चुनाव में कुछ भी खोने को नहीं है। क्योकि पिछले चुनावों में उनकी सीटें शून्य थीं। इसलिए जो भी उनको मिलेगा वह प्लस होगा। वह चाहें वोट प्रतिशत हो या सीटें। दिल्ली के लोगों में यह संदेश है कि कांग्रेस उतनी मजबूती से मैदान में नहीं है जितनी मजबूती से होना चाहिए था।
हालांकि कांग्रेस जैसी राष्ट्रीय पार्टी में दिल्ली के चुनावी परिणाम से किसी चेहरे को कोई खास नुकसान नहीं होने वाला, लेकिन कोई बहुत बड़े चेहरे का इस चुनाव से उदय भी नहीं होने वाला है। दिल्ली के चुनाव से राहुल गांधी या प्रियंका गांधी के कैरियर पर भी कोई खास फर्क नहीं पडने वाला। क्योंकि पार्टी ने उस तरह से ताकत नहीं झोंकी जितनी प्रियंका या राहुल यूपी की घटनाओं में या चुनावों में झोंक देते हैं।