कंपनी की तरफ से पेश हुए वकील ने कहा कि एजेंसी ने गलत तरीके से कार्यवाही की है, क्योंकि उन्होंने 30 जून, 2021 को ईसीआईआर दर्ज करते समय स्वामी ने शिकायत की प्रमाणित प्रति प्राप्त किए बिना कार्यवाही की। उन्होंने कहा कि कोई देश का सबसे अच्छा शेफ हो सकता है, लेकिन चावल के बिना बिरयानी नहीं बना सकती। दुबे ने यह भी तर्क दिया कि एजेंसी ने विभिन्न चरणों में अपराध की आय को परिभाषित करते समय अलग-अलग रुख अपनाया। कंपनी की ओर से दलीलें मंगलवार को जारी रहेंगी। इस दौरान सुमन दुबे, सैम पित्रोदा की तरफ से भी तर्क पेश किए गए।
ईडी के अनुसार, सोनिया और राहुल गांधी ने दिवंगत कांग्रेस पदाधिकारियों मोतीलाल वोरा और ऑस्कर फर्नांडिस के साथ-साथ सुमन दुबे, सैम पित्रोदा और एक निजी फर्म यंग इंडियन के साथ मिलकर नेशनल हेराल्ड अखबार प्रकाशित करने वाली एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड की 2,000 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति पर धोखाधड़ी से कब्जा करके धन शोधन की साजिश रची। सैम पित्रोदा की तरफ से पेश हुए वकील ने अदालत को सूचित किया कि सैम अब शिकागो में रहते हैं और 84 वर्ष की आयु में वे कैंसर और हृदय रोग सहित विभिन्न आयु-संबंधी बीमारियों से पीड़ित हैं। उन्होंने कहा कि पित्रोदा को अपराध के लिए कोई विशिष्ट भूमिका नहीं सौंपी गई थी और उनके मुवक्किल ने कानून के दायरे में सब कुछ किया।