इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (इसरो) ने जिले में 260 वेटलैंड खोज निकाले हैं। डिजिटल मैपिंग के जरिये तैयार रिपोर्ट के मुताबिक इनमें से 95 वेटलैंड प्राकृतिक, जबकि 165 मानवनिर्मित हैं। इनकी स्थिति जानने के लिए वन विभाग ने लोकेशन का ब्योरा मांगा है। बताया गया है कि इस माह के अंत तक उसे ब्योरा मिल जाएगा।
दरअसल, पिछले दिनों अहमदाबाद स्थित इसरो के स्पेस एप्लीकेशन सेंटर ने डिजिटल मैपिंग के आधार पर नेशनल वेटलैंड एटलस तैयार की थी। इसमें गौतमबुद्ध नगर में कुल 260 वेटलैंड बताए गए। खास बात है कि ये सभी 50000 वर्ग मीटर से बड़े हैं, जिनकी मैप में स्थिति एक इंच से अधिक है। इसके बाद वन विभाग ने उत्तर प्रदेश रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर, लखनऊ से वेटलैंड के अक्षांश और देशांतर का ब्योरा मांगा, ताकि मौके पर जाकर इनका सत्यापन किया जा सके। फरवरी के अंत में विभाग ने लोकेशन की रिपोर्ट लेने के लिए जरूरी फीस भी जमा करा दी है।
दूसरी तरफ वन विभाग ने इसरो द्वारा बताए वेटलैंड को चिह्नित करने का कार्य शुरू कर दिया है। अक्षांश-देशांतर का ब्योरा मिलने के बाद कार्य तेजी से होगा। बता दें कि इसरो ने जहां जनपद में 260 वेटलैंड बताए हैं, वहीं कागजों में सिर्फ 6 वेटलैंड ही दर्ज हैं, जबकि 2009 में प्रदेश स्तर पर तैयार रिपोर्ट में 19 वेटलैंड बताए गए थे। जिले के वेटलैंड सारस, सारंग, इंडियन स्पोटेड ईगल, ग्रेलेज गूज, सुरखाब और काले हिरण के लिए जाने जाते हैं।
तीन माह में चिह्नित करने का आदेश
पर्यावरणविद् आनंद आर्या की याचिका पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) ने इसरो की डिजिटल मैपिंग के आधार पर
तीन माह में वैटलेंड चिह्नित करने का आदेश प्रदेश सरकार को दिया है। साथ ही इसकी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपने का निर्देश दिया है। इसके बाद केंद्र को एक माह के भीतर वेटलैंड का दर्जा देना है।