इसरो चीफ ने बताई भविष्य की योजना
वह आईआईटी दिल्ली में इंडियाज स्पेस प्रोग्रामः द चैलेंजेज एंड वे फॉरवर्ड विषय पर आयोजित व्याख्यान में हिस्सा लेने के लिए पहुंचे। इस दौरान उन्होंने भारत की अंतरिक्ष यात्रा और भविष्य की योजनाओं को सामने रखा। आईआईटी दिल्ली के साथ सौर पैनल तकनीक और बायोमैकेनिक्स समेत नए क्षेत्रों में इसरो और संस्थान के बीच सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की गई। आईआईटी दिल्ली के निदेशक प्रो. रंगन बनर्जी ने कहा कि अंतरिक्ष उन क्षेत्रों में है जहां भारत ने वैश्विक स्तर की स्वदेशी तकनीक विकसित की है।
गगनयान से पहले मानवरहित मिशन की तैयारी
वहीं इसरो प्रमुख डॉ. वी नारायणन ने बताया कि गगनयान के पहले मानवरहित मिशन की तैयारी चल रही है। भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन का पहला मॉड्यूल 2028 तक भेजने की योजना है। जबकि 2035 तक इसके अन्य मॉड्यूल तैयार करने का लक्ष्य है। चंद्रयान-4 से चंद्र नमूने पृथ्वी पर लाने, शुक्र मिशन और 2040 तक मानव को चंद्रमा पर उतारने की दिशा में भी काम चल रहा है।
भारत के निर्माण में योगदान देना लक्ष्य
इसके अलावा 30 हजार किलोग्राम तक भार को लो-अर्थ ऑर्बिट में पहुंचाने वाले अगली पीढ़ी के प्रक्षेपण यान और आंशिक रूप से दोबारा उपयोग होने वाले रॉकेट विकसित किए जा रहे हैं। उन्होंने छात्रों से यह भी कहा कि उनका लक्ष्य सिर्फ अच्छी नौकरी हासिल करना नहीं बल्कि 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में योगदान देना होना चाहिए।