केंद्र सरकार ने वसंत विहार गैंगरेप मामले में दोषी ठहराए गए नाबालिग को बाल सुधार गृह में रखने की अवधि बढ़ाने की दलील का समर्थन किया है।
केंद्र ने हाईकोर्ट को बताया कि नाबालिग दोषी की रिहाई के बाद उसके पुनर्वास की योजना से कई जरूरी बातें नदारद हैं। इन पर दोबारा से विचार करने की जरूरत है। अदालत ने इस मुद्दे पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
गौरतलब है कि नाबालिग को 20 दिसंबर को बाल सुधार गृह से रिहा किया जाना है। वहीं, भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने नाबालिग की रिहाई पर रोक को लेकर जनहित याचिका डाली है।
वर्तमान परिस्थितियों में वह समाज में जाने लायक नहीं
इस पर मुख्य न्यायाधीश जी.रोहिणी व न्यायमूर्ति जयंत नाथ की खंडपीठ सुनवाई कर रही है। केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) संजय जैन ने खंडपीठ के समक्ष नाबालिग द्वारा किए अपराध व उसकी रिहाई पर चिंता जताई।
उन्होंने कहा कि सुधार गृह में नाबालिग की काउंसलिंग करवाई गई। काउंसलर द्वारा दी गई रिपोर्ट में उसकी मानसिक स्थिति पर चुप्पी साधी गई है। रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट नहीं है कि रिहाई के बाद वह क्या करना चाहता है।
वर्तमान परिस्थितियों में वह समाज में जाने लायक नहीं है। साथ ही किशोर न्याय अधिनियम के तहत गठित प्रबंधन समिति की योजना में कई कमियां हैं।
नाबालिग के मानसिक स्वास्थ्य का कोई जिक्र नहीं
इसमें नाबालिग के मानसिक स्वास्थ्य का कोई जिक्र नहीं है। इसे शामिल करना नियमानुसार बहुत जरूरी है। नाबालिग के पुनर्वास की नीति में भी कई कमियां है।
नई नीति बनाई जा रही है। उन्होंने खंडपीठ से अपील की कि उसकी रिहाई तब तक न की जाए जब तक रिहाई के बाद पुनर्वास की योजना तय नहीं हो जाती।
खंडपीठ ने कहा कि पेश रिपोर्ट व आईबी द्वारा दी गई रिपोर्ट के आधार पर वे जल्द फैसला देंगे।