गुरु तेग बहादुर अस्पताल के एडिशनल मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ प्रवीण ने बताई बड़ी वजह
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संवाद न्यूज एजेंसी नई दिल्ली। आज की भाग-दौड़ भरी जिंदगी में चिड़चिड़ापन एक आम समस्या बन चुकी है। इसे लेकर लोग अक्सर डिप्रेशन और तनाव में भी रहने लगते हैं। लेकिन डॉक्टरों के अनुसार इसके पीछे एक बड़ी वजह एनीमिया है। खासकर महिलाओं में एनीमिया न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर रहा है। गुरु तेग बहादुर अस्पताल के एडिशनल मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ प्रवीण कुमार ने बताया कि इस स्थिति में शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर कम हो जाता है, जिससे दिमाग तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती। इसका सीधा असर मानसिक संतुलन पर पड़ता है। ऐसे में व्यक्ति में जल्दी थकान, सांस लेने में दिक्कत, ध्यान केंद्रित करने में दिक्कत और भावनात्मक रूप से अस्थिरता जैसी समस्याएं आने लगती हैं। इस कारण एनीमिया से पीड़ित लोगों में चिड़चिड़ापन, बैचेनी और उदासी के लक्षण बढ़ने लगते हैं।
हीमोग्लोबिन की कमी से होने वाला एनीमिया सबसे आम है। गलत खानपान, जंक फूड की बढ़ती आदत प्रमुख कारण हैं। कई मामलों में लोग मानसिक परेशानी समझकर एंटी-डिप्रेशन दवाएं लेने लगते हैं, जबकि असली समस्या खून की कमी होती है। महिलाओं में एनीमिया का असर अधिक गंभीर देखा जा रहा है। माहवारी के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव, गर्भावस्था और स्तनपान के समय पोषण की कमी मानसिक थकान और चिड़चिड़ापन बढ़ा देती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए शारीरिक पोषण उतना ही जरूरी है। आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन बी12 से भरपूर आहार न केवल शरीर को मजबूत बनाता है, बल्कि चिड़चिड़ापन और मानसिक असंतुलन को भी कम करने में अहम भूमिका निभाता है।