फरीदाबाद विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली से हर वर्ष सैकड़ों विद्यार्थी मानसिक प्रताड़ना के साथ ही आर्थिक चपत भी झेलते हैं। शिक्षा में बढ़ते माफियागिरी का नतीजा है पिंकी की मौत। ये कहना है शहर के शिक्षाविदों का।
उनका मानना है कि हर वर्ष पिंकी जैसे हजारों विद्यार्थी एमडीयू की अनदेखी और लापरवाही का शिकार होते हैं। उसके बावजूद इसके तह तक पहुंचने की कभी कोशिश नहीं की गई।
उधर, छात्रनेताओं ने पूरे मामले के पीछे एमडीयू की ठेका कंपनी नयासा और वीसी को दोषी ठहराया है। एमडीयू से संबंधित सभी कॉलेजों में हर वर्ष ही सैकड़ों विद्यार्थियों का कंपार्टमेंट आता है।
दो वर्ष पूर्व भी करीब एक हजार कॉपियां बिना चेक की पाई गई। विरोध के बाद रिचेकिंग में फेल विद्यार्थी पास हो जाते हैं। हर वर्ष होने वाले हंगामे और विरोध के बाद भी विश्वविद्यालय के हालात नहीं सुधरे।
शिक्षाविद्, सीमा भारद्वाज का कहना है कि, विश्वविद्यालय में कर्मचारी कम हैं तो उन्हें भर्ती किया जाए मगर निजी कंपनी द्वारा इस प्रक्रिया को पूरा कराने की बात सिर से निकलती है। ऐसा करके शिक्षा में माफियागिरी को बढ़ावा दिया जा रहा है। हर वर्ष हजारों बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जाता है। इस पर रोक लगनी चाहिए।
शिक्षाविद्, डॉ. जीडी शर्मा का कहना है कि, जब एक कॉपी दो तीन चरणों से गुजरती है और परीक्षक उसके बकायदा पैसे लेता है तो आखिर गड़बड़ी का चांस कहां से आता है? यानी कहीं न कहीं ऑनलाइन विद्यार्थियों के नंबर चढ़ाने आदि में कहीं लापरवाही हो रही है। एक कक्षा में 10-20 बच्चे फेल होंगे न कि पूरे-पूरे विद्यार्थी। इसके खिलाफ जांच होनी चाहिए।
फरीदाबाद, युवा शक्ति की संयोजक जसवंत सैनी के अनुसार, हर वर्ष ही रिजल्ट में गड़बड़ी का मामला उजागर होता है। इसे लेकर कई बार विरोध प्रदर्शन भी हुए। नयासा कंपनी का ठेका खत्म होने के बाद भी विश्वविद्यालय इनसे काम करा रहा है। जबकि युवा शक्ति के विरोध के बाद इनका ठेका निरस्त कर देने की बात कही गई थी, मगर पिंकी मामले के बाद फिर से इनका नाम उछलना विश्वविद्यालय की लापरवाही की पोल खोलता है। प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।