दिल्ली में सरकार बनाने की जद्दोजहद के बीच एक बार फिर से गेंद उपराज्यपाल नजीब जंग के पाले में आ पहुंची है। दिल्ली में सरकार बनेगी या नहीं इसका फैसला अगले 12 दिन में हो जाएगा।
पिछली सुनवाई में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि राष्ट्रपति ने उपराज्यपाल को यह मंजूरी दी है कि वे सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते भाजपा को सरकार बनाने के लिए न्योता दें।
हालांकि अब बाजी पलटती दिख रही है। सूत्रों के अनुसार, यह जरूरी नहीं है कि उपराज्यपाल भाजपा को ही सरकार बनाने के लिए बुलाएं। क्योंकि राष्ट्रपति ने उन्हें यह भी निर्देश दिए हैं कि वे सरकार बनाने के सभी विकल्पों पर गौर करें इसके बाद ही कोई फैसला करें।
उपराज्यपाल के पास हैं 3 विकल्प
दिल्ली में 49 दिनों तक शासन करने वाली आम आदमी पार्टी ने 14 फरवरी को सरकार से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद से ही राजधानी में राष्ट्रपति शासन लागू है।
सूत्रों के अनुसार, सरकार बनाने के मुद्दे पर गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात करने के बाद उपराज्यपाल ने पहले भाजपा को न्योता देने का फैसला लिया है। अगर भाजपा यह प्रस्ताव स्वीकार करती है तो वे भाजपा से अपना बहुमत साबित करने को कहेंगे।
हालांकि अगर भाजपा सरकार बनाने से मना करती है तो उपराज्यपाल यही प्रस्ताव आम आदमी पार्टी के सामने भी रखेंगे। अगर आम आदमी पार्टी इस बात पर राजी होती है तो उसे अपना बहुमत साबित करना होगा लेकिन 'आप' के इंकार करने पर उपराज्यपाल के पास आखिरी रास्ता चुनाव ही होगा।
अगर दोनों बड़ी पार्टियां सरकार बनाने से मना करेंगी तो उपराज्यपाल राष्ट्रपति से विधानसभा भंग करके दोबारा चुनाव कराने की संस्तुति करेंगे।
भाजपा खेल रही है दोहरा 'गेम'!
गुरुवार को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने उपराज्यपाल के प्रयासों की तारीफ करते हुए कहा कि उन्हें मीडिया के जरिए यह जानकारी मिली है कि वे सरकार बनाने की संभावनाएं तलाश रहे हैं यह अच्छी बात है। कोर्ट इसके लिए उन्हें 12 दिनों का समय देती है।
बता दें कि 70 सदस्यों वाली दिल्ली विधानसभा में विधायकों की संख्या फिलहाल 67 है। तीन सीटों पर आगामी 25 नवंबर को उपचुनाव होने हैं। अगर अगली सुनवाई में यह स्पष्ट हो जाता है कि सरकार दिल्ली में सरकार बनेगी तो उपचुनाव की तैयारियां जारी रहेंगी, लेकिन अगर विधानसभा भंग करने पर सहमति बनी तो उपचुनाव रद्द करके दोबारा चुनाव कराने की तैयारी शुरू होगी।
इस बीच यह भी चर्चा है कि भाजपा दिल्ली में सरकार बनाने से ज्यादा उपचुनावों पर फोकस कर रही है। भाजपा का लक्ष्य तीनों सीटें जीतना है। इससे प्रदेश में पार्टी की छवि और जनाधार का भी पता चल सकेगा। इसी के आधार पर भाजपा दोबारा चुनाव में जाने का फैसला करेगी।