इतिहास से पॉल अब्राहम की मुलाकात बचपन में हो गई थी। दिल्ली के हौज खास के ऐतिहासिक मैदान में खेलते, खिलजी टैंक, सिरी फोर्ट, फिरोज शाह तुगलक की कब्र के आसपास उछलते-कूदते पॉल बड़े हो रहे थे कि एक दिन उनके पिता ने उन्हें एक वैसलीन की बोतल में प्राचीन त्रावणकोर शासन के दस सिक्के दिए थे। बस उसी दिन से पॉल की जिंदगी बदल गई।
वे बताते हैं, “17 साल की उम्र में इतिहास से लगाव हुआ। कलात्मक चीजों से प्यार हुआ। प्राचीन सिक्के की लिखावट को समझने के लिए मैंने आठ साल तक उर्दू सीखी।” आज पॉल अब्राहम इंडस्लैंड बैंक के सीओओ हैं, लेकिन शौक उनके लिए बड़ी चीज है। उनके पास कलात्मक वस्तुओं और पेंटिंग्स का जो संग्रह है, उसने उन्हें एक नई पहचान दी है।
उन्होंने मुंबई में ‘सरमाया आर्काइव’ को बनाकर उन लोगों को एक दिशा दी है, जो इतिहास को चीजों के माध्यम से महसूस करना चाहते हैं। इस आर्काइव में लुप्त होती लोककलाओं, ऐतिहासिक सिक्कों, किताबों और चित्रों का दुर्लभ संग्रह है।
मुगल कालीन सिक्कों, पुराने मानचित्रों, आदिवासी कलाकृतियों और 19वीं सदी की तस्वीरों का अनूठा संग्रह है यहां। मुंबई और दिल्ली में उनकी लाइब्रेरी में आठ हजार से ज्यादा किताबें शामिल हैं। उनका यह संग्रह शोधकर्ताओं और इतिहास में रुचि रखने वालों के लिए बहुत कीमती है।
उनके पास सबसे पुरानी चीजों में कुछ चीजें 2500 साल पुरानी हैं। उनके पास मौजूद दुर्लभ सिक्कों में कुछ 1700 ईसवी की शुरुआत के हैं। 2014 में अब्राहम की पत्नी का कैंसर के चलते निधन हो गया। वह कहते हैं कि सरमाया को शुरू करने के पीछे का विचार उसका ही था, ताकि जुटाई गई चीजों के माध्यम से हमारी विरासत से युवा को जोड़ा जा सके।