34 की उम्र थी, बच्चे छोटे थे, नया कारोबार शुरू कर रही थी, सब कुछ ठीक चल रहा था। अचानक कुछ परेशानी शुरू हुई। लगा सामान्य बीमारी होगी। जांच करवाई तो सर्वाइकल कैंसर का पता चला। यह जानकर पैरों के नीचे की जमीन खिसक गई। कुछ समझ नहीं आ रहा था, लेकिन हार नहीं मानी। डॉक्टरों की सलाह पर जांच करवाई। लंबा इलाज चला। आज 53 की उम्र में कैंसर को पूरी तरह से हराकर स्वस्थ हूं और कारोबार भी खड़ा कर दिया है। यह कहानी है कमलजीत बीसला की।
बीसला बताती है कि करीब 19 साल पहले खून के रिसाव की शिकायत हुई। बार-बार ऐसा होने पर डॉक्टर से संपर्क किया। कैंसर होने का कोई सवाल ही दिमाग में नहीं उठ पाया। जिंदगी भर स्वस्थ भोजन किया। कभी शराब नहीं पी, धूम्रपान नहीं किया। एक एथलेटिक थी। डॉक्टर ने पैप स्मीयर कराने की सलाह दी। इसमें कुछ साफ नहीं हुआ। उसके बाद ऊतक की जांच हुई। दिसंबर का महीना था। बच्चों की परीक्षाएं सिर पर थे। ऐसे में कुछ भी नकारात्मक सोचने के लिए समय नहीं था। लेकिन एक दिन डॉक्टर ने बुलाया और इस रोग के बारे में बताया। यह जानकर पूरा परिवार परेशान हो गया।
डॉक्टरों के धैर्य से मिली शक्ति
उत्तर-पूर्व दिल्ली के अस्पताल में डॉक्टरों ने बड़े धैर्य से मुझे समझाया। उस समय इलाज के लिए आधुनिक तकनीक नहीं थी। ऐसे में पूरी जांच के बाद सर्जरी की। सर्जरी के दौरान पता चला कि कैंसर ओवरी के कुछ हिस्से तक पहुंच गया है। सर्जरी के दौरान डॉक्टरों ने कुछ जरूरी हिस्सों को हटाया। साथ ही लंबे समय तक हिस्टेरेक्टॉमी करानी पड़ी। इसके बाद डॉक्टरों ने बताया कि अब मुझे कभी पीरियड्स नहीं होंगे। यह मेरे लिए चिंता का विषय था। उस समय मुझे लगा कि मेरी पूरी दुनिया बिखर गई। लेकिन हार नहीं मानी। कैंसर से जंग लड़ी और उसे हराकर पर्यटन के अपने कारोबार को फिर से खड़ा किया। आज अपने परिवार का सहारा बनी हुई हूं।
कैंसर का पता चलने पर मिला परिवार का सहयोग
कैंसर के बारे में पता चलने के बाद पूरे परिवार का सहयोग मिला। मां, सास मेरे बच्चे मेरी शक्ति बन गए। वहीं, डॉक्टरों की देखभाल से अपनी जंग को आसानी से लड़ पाई। उस समय बेटा काफी छोटा था। उसकी देखभाल पति कर रहे थे। मेरे शुरू किए गए व्यवसाय की देखभाल भी पति कर रहे थे। परिवार और डॉक्टरों से मिला सहयोग मेरी शक्ति बना जिसने जंग को आसान कर दिया।
महिलाओं में सामान्य है यह कैंसर
दिल्ली राज्य कैंसर संस्थान में क्लिनिकल ऑन्कोलॉजी विभाग की प्रमुख डॉ. प्रज्ञा शुक्ला ने कहा कि महिलाओं में यह दूसरा सबसे ज्यादा होने वाला कैंसर है। इसकी रोकथाम संभव है। 9 से 14 साल की उम्र की लड़कियों में वैक्सीन लगाकर इसे रोका जा सकता है। पहले यह गरीब या मध्यम परिवार में ज्यादा होता था। लेकिन अब उच्च आय वर्ग में भी इसके मामले मिल रहे हैं। इसे लेकर जागरूकता फैलाने से इसकी रोकथाम हो सकती है।
- एचपीवी टीका को लेकर एम्स में जल्द अध्ययन शुरू होगा। एचपीवी को लेकर स्वदेशी टीका तैयार हो गया है। ऐसे में एम्स के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में इसे लेकर टीके की दो और तीन डोज के प्रभाव को लेकर अध्ययन शुरू होगा। बता दें कि केंद्र सरकार ने भी बजट में टीका देने की घोषणा की है।