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पश्चिम दिल्ली में चल रहा था अन्तर्राष्ट्रीय फर्जी कॉल सेंटर, 32 गिरफ्तार 

Sun, 17 Nov 2019 08:45 PM IST
Avdhesh Kumar अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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पश्चिम दिल्ली जिले की साइबर सेल ने कनाडा के पांच सौ लोगों से करोड़ों की ठगी करने वाले अन्तराष्ट्रीय फर्जी कॉल सेंटर का खुलासा किया है। शनिवार रात पुलिस टीम ने मोती नगर इलाके में चल रहे सेंटर पर छापा मारकर वहां काम कर रहे 32 लोगों को गिरफ्तार किया है। कॉल सेंटर चलाने वाले मालिक समेत पांच लोग फरार हैं। उनकी उनकी तलाश कर रही है। 
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आरोपियों ने पिछले चार माह से कनाडा मूल के करीब पांच सौ लोगों से लाखों की ठगी को अंजाम दिया है। आरोपी खुद को कनाडा पुलिसकर्मी बताकर वहां के नागरिकों के सिन नंबर(सरकार की ओर से जारी व्यक्ति का पहचान नम्बर) से आपराधिक गतिविधि में लिप्त होने की बात कहकर धमकाते थे और फिर उनसे बिटकॉइन में उगाही करते थे। 

आरोपी गैर कानूनी तरीके से कॉल सेंटर चलाकर भारत सरकार को करीब एक हजार करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान पहुंचा चुके हैं। डीटीओ(दूरसंचार विभाग) भी अपने स्तर पर मामले की जांच कर रही है। पुलिस ने कनाडा निवासी एल्विस हेनरी की शिकायत पर आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर कर जांच कर रही है। 
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साथ ही कॉल सेंटर चलाने वाले मालिक समेत फरार पांच आरोपियों की तलाश कर रही है। पुलिस ने मौके से 55 कम्प्यूटर, तीन पैच प्वाइंट, तीन इंटरनेट डिस्टीब्यूशन स्वीच, दो इंटरनेट राउटर, 35 मोबाइल फोन, टेली कम्यूनिकेशन साफ्टवेयर और वीओआईपी(इंटरनेट) कॉलिंग डाइलर मिला है। 

जिले के अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त समीर शर्मा ने बताया कि पुलिस को शिकायत मिली थी कि मोती नगर स्थित एक कॉल सेंटर से कुछ लोग कनाडा के लोगों से धमकाकर उनसे उगाही कर रहे हैं। पुलिस ने दूर संचार विभाग को जानकारी दी। साथ ही जिले की साइबर सेल ने मामले की जांच शुरू की। 

पुलिस व दूरसंचार की टीम शनिवार रात डीएलएफ औद्योगिक क्षेत्र मोती नगर स्थित एक कार्यालय पर छापा मारा। तीन फ्लोर पर एक कॉल सेंटर चलाया जा रहा था। वहां एक मैनेजर सहित 32 लोग काम कर रहे थे। सभी कनाडा के लोगों को फोन कर रहे थे। पुलिस ने कॉल सेंटर के दस्तावेज मांगे लेकिन उनके पास कोई कागजात मौजूद नहीं था। जांच में पता चला कि कॉल सेंटर को फर्जी तरीके से चलाया जा रहा है। पुलिस ने वहां मौजूद सभी लोगों को गिरफ्तार कर लिया। 

कनाडा के पुलिस अधिकारी बनकर वहां के लोगों से करते थे उगाही 

पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि वह कनाडा के पुलिस अधिकारी बनकर वहां के लोगों को धमकाते थे और बाद में उनसे उगाही करते थे। कॉल सेंटर चलाने वाले आरोपी कनाडा मूल के नागरिकों को सरकार की ओर से मिलने वाले सिन नंबर के डाटा को चुरा लेते थे। 

फिर उन्हें फोन कर बताते थे कि उनके सिन नंबर का इस्तेमाल आतंकियों को फंडिंग करने में किया गया है।  जिसकी वजह से सरकार अपने बैंक अकाउंट में जमा पैसे को जब्त कर रही है। उसके बाद उन्हें मामले की जांच होने का डर दिखाते थे। बाद में उन्हें समझौता की बात कहकर विदेशी नागरिकों को उनके फोन नंबर पर फोन करने के लिए कहते थे। 

जब पीड़ित आरोपियों को फोन करता था वह उन्हें पैसे को बिटकॉइन ब्लॉकचेन वॉलेट एप पर ट्रांसफर करने के लिए कहते थे। आरोपी इस एप को कनाडा सरकार का अधिकारिक एप बताते थे। पैसे आने के बाद वह पीड़ित से बात करना बंद कर देते थे। 
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