- आय प्रमाण पत्र दाखिल करने के बाद भी विशेष रूप से कमजोर वर्ग प्रमाण पत्र न देने पर दाखिला अस्वीकार किया गया था
- अदालत ने कहा बच्ची ने लॉटरी के जरिए अपना स्थान सुरक्षित किया
- अंतिम फैसला आने तक बच्ची को कक्षा में बैठने की अनुमति दी जाए
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस) द्वारा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) प्रमाणपत्र न देने के आधार पर कक्षा-1 में दाखिला अस्वीकार करने के फैसले पर अंतरिम राहत दी है। याचिकाकर्ता बच्ची भाविका को शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय, खिचड़ीपुर में कक्षाओं में बैठने की अनुमति दी है।
न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की एकल पीठ ने 3 अगस्त को दिए आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता ने वैध आय प्रमाणपत्र जमा किया था, जिसमें वार्षिक आय 5 लाख रुपये से कम बताई गई है। केवीएस के प्रवेश दिशानिर्देशों के अनुसार कमजोर वर्ग/ईडब्ल्यूएस की परिभाषा संबंधित राज्य सरकार के अधिसूचना के अनुसार लागू होती है। दिल्ली सरकार के 3 जनवरी 2025 के परिपत्र के मुताबिक ईडब्ल्यूएस श्रेणी में वे बच्चे आते हैं जिनके माता-पिता की कुल वार्षिक आय सभी स्रोतों से 5 लाख रुपये से कम हो। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता ने लॉटरी प्रक्रिया के जरिए 25 प्रतिशत आरटीई कोटे में चयन हासिल किया था, दस्तावेज जमा किए थे और शुरू में व्हाट्सएप ग्रुप में भी जोड़ा गया था। बाद में अलग ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र न होने के आधार पर दाखिला रद्द कर दिया गया। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवीएस स्वयं अपने दिशानिर्देशों में राज्य सरकार के मानदंडों को लागू करने का उल्लेख करता है, इसलिए वह इन मानदंडों की अनदेखी नहीं कर सकता। अगली सुनवाई तक उसे कक्षा-1 में पढ़ने की अनुमति दी गई। मामला 15 दिसंबर 2026 को सूचीबद्ध किया गया है।