गाजीपुर नाले में गिरने से मां-बेटे की मौत हो गई थी। इस मामले में अब दिल्ली विकास प्राधिकरण उनके परिजनों को 20 लाख रुपये मुआवजा देगा। यह आदेश दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली विकास प्राधिकरण को दिया है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने बृहस्पतिवार को डीडीए को जुलाई में गाजीपुर नाले में गिरने से मां-बेटे की हुई मौत मामले में दोनों के कानूनी उत्तराधिकारियों को 20 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया है। दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के वकील ने शुरू में कहा कि वह पीड़ित परिवार को मुआवजे के तौर पर 15 लाख रुपये देने को तैयार है, लेकिन कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन व न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने इसे आदर्श बताते हुए 20 लाख रुपये देने को कहा।
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डीडीए के वकील ने कहा कि अपने अधिकारों और विवादों के प्रति पूर्वाग्रह के बिना और अपनी ओर से किसी भी दायित्व को स्वीकार किए बिना, मानवीय भाव के तौर पर वह मृतक तनुजा और प्रियांश के कानूनी उत्तराधिकारियों को 20 लाख रुपये देने को तैयार है। अदालत मयूर विहार फेज 3 निवासी झुन्नू लाल श्रीवास्तव द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें ठेकेदार और डीडीए अधिकारियों के खिलाफ उनकी कथित लापरवाही के लिए कार्रवाई की मांग की गई थी, जिसके कारण महिला और उसके तीन वर्षीय बेटे की मौत हो गई थी।