एम्स स्थित रैन बसेरे में 22 लोगों के कोरोना संक्रमित पाए जाने पर हाईकोर्ट ने दिल्ली के मुख्य सचिव को वहां निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। पीठ ने कहा कि इसकी जांच की जाए कि दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डीयूएसआईबी) किस तरह रैन बसेरों में रहने वाले लोगों को कोरोना से बचाने के लिए काम कर रहा है। बिना देरी किए उचित कदम उठाने के निर्देश भी दिए।
एम्स में बाहरी मरीजों के इलाज से जुड़ी दो याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए पीठ ने यह निर्देश जारी किए। न्यायमूर्ति विपिन सांघी और रजनीश भटनागर की पीठ ने दिल्ली सरकार, दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड, एम्स और सामाजिक कार्यकर्ता रचना मलिक को स्थिति की रिपोर्ट देने को कहा है।
इसके साथ ही पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 27 मई के लिए सूचीबद्ध कर दी है। इस दौरान डीयूएसआईबी ने कहा कि रैन बसेरे में मिले दो संक्रमितों को लोकनायक जय प्रकाश नारायण और राजीव गांधी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में भर्ती करवाया गया है।
इस पर पीठ ने डीयूएसआईबी, एम्स और दिल्ली के प्रमुख स्वास्थ्य सचिव से जवाब मांगा है कि कोरोना संक्रमितों को एम्स में ही भर्ती क्यों नहीं किया गया, उन्हें दूर स्थित अस्पतालों में क्यों भेजा गया?
मामले की गंभीरता को देखते हुए पीठ ने सामाजिक कार्यकर्ता रचना मलिक को निर्देश दिया कि वह बिना किसी देरी के एम्स स्थित रैन बसेरे में रह रहे लोगों का निरीक्षण करें और वीडियोग्राफी कर, रिपोर्ट पीठ के समक्ष पेश करें।