डीएनए और एफएसएल जांच में दो लोगों द्वारा किशोरी के साथ दुष्कर्म की पुष्टि हुई, लेकिन पीड़िता ने डीएनए रिपोर्ट को झुठलाते हुए एक युवक को ही आरोपी ठहराया। पीड़िता व पुलिस के बयानों में विरोधाभास और पीड़िता के बयानों में बार-बार बदलाव की स्थिति में अदालत ने कथित दुष्कर्म के दो आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी किया है।
कड़कड़डूमा कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अश्वनी कुमार सरपाल ने मामले से जुड़े तथ्यों की पड़ताल के आधार पर आरोपी अशोक की गिरफ्तारी को संदेहजनक बताते हुए कहा कि पीड़िता और पुलिस के बयानों में विरोधाभास है।
पीड़िता ने अशोक को दुष्कर्म का आरोपी बताया, जबकि डीएनए और एफएसएल रिपोर्ट में विक्की पर भी दुष्कर्म का आरोप साबित हुआ। ऐसे में पीड़िता और पुलिस के बयान असत्य और अविश्वसनीय लगते हैं।
लिहाजा अदालत अशोक को संदेह का लाभ देते हुए बरी करती है। वहीं, अदालत ने कहा कि विक्की पर किशोरी के अपहरण का चार्ज बनता है, लेकिन किशोरी ने उसके खिलाफ कोई बयान नहीं दिया तो उसे भी अदालत बरी करती है।