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एम्स प्लाज्मा थेरेपी ट्रायल : गंभीर मरीजों पर नहीं हो रहा कारगर, मृत्यु दर भी लगभग बराबर  

Thu, 06 Aug 2020 06:03 PM IST
Mohit Mudgal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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डॉ. रणदीप गुलेरिया, निदेशक, दिल्ली एम्स - फोटो : Amar Ujala
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एम्स में चल रहा प्लाज्मा थेरेपी ट्रायल गंभीर मरीजों पर बहुत कारगर साबित नहीं हो रहा है। हालांकि जांच अभी बहुत प्रारंभिक स्तर पर  है। एम्स में ट्रायल के लिए 15-15 लोगों के दो ग्रुप बनाए गए हैं। दोनों ग्रुपों में अलग-अलग तरीके से इलाज किया जा रहा है।

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एम्स निदेश डॉ. रणदीप गुलेरिया ने बताया कि यह प्रारंभिक विश्लेषण हैं। प्लाज्मा थेरेपी के प्रभाव को जानने के लिए 15-15 लोगों के दो ग्रुप बनाए गए हैं। इनके साथ नियंत्रित परीक्षण किया जा रहा है। एक ग्रुप को मानक उपचार प्रोटोकॉल के हिसाब से  इलाज दिया जा रहा है। 

जबकि दूसरे ग्रुप को मानक उपचार के साथ प्लाजमा थेरेपी दी जा रही है। अभी जांच में यह सामने आया है कि दोनों ग्रुप में मृत्यु दर बराबर है। इसी के साथ मरीजों में प्लाज्मा थेरेपी का कोई अधिक लाभ नजर नहीं आ रहा है।
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डॉ. गुलेरिया ने आगे बताया कि जांच में यह भी सामने आया है कि प्लाज्मा थेरेमी सुरक्षित है और मरीजों को इससे कोई नुकसान नहीं हुआ है। मगर इसकी के साथ यह बहुत प्रभावी नहीं है। इसलिए इसका विवेकपूर्ण उपयोग किया जाना चाहिए।

उपचार प्रोटोकॉल में कहा गया है कि प्लाज्मा थेरेपी उन मरीजों पर उपयोग की जा सकती है, जिनमें स्टेरॉयड के उपयोग के बावजूद भी सुधार नहीं हो रहा है। 

इसी के साथ भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद भी प्लाज्मा थेरेपी के प्रभाव का मूल्यांकन करने के लिए परीक्षण कर रहा है। हालांकि इसके परिणाम अभी सामने नहीं आए हैं।

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