शहर के सेक्टर 55 स्थित आनंद निकेतन वृद्ध सेवा आश्रम में अव्यवस्था होने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस दौरान शनिवार को भी पूरे दिन प्रशासन से लेकर वृद्धजनों के बीच गहमा-गहमी बनी रही। वहीं इस मामले को लेकर आश्रम के ट्रस्ट प्रमुखों ने परिवार संग बैठक कर पिछले दो दिनों तक हुई गतिविधि के बारे में बताया और कहा कि जिस केयर टेकर ने महिला के हाथ बांधे वह गलत था, उसे काम से निकाल दिया गया है।
शनिवार की दोपहर में आश्रम संचालित करने वाले ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने वृद्धजनों के परिवार संग बैठक की। जहां उन्होंने परिवार को पिछले दो दिनों तक हुए पूरे घटनाक्रम के बारे में बताते हुए कहा कि यहां कुल 39 वृद्धों की देखभाल की जाती है। इनको संभालने के लिए कुल 15 केयर टेकर हैं। उनका कहना है कि वह आश्रम में हर समय मौजूद नही रहते हैं।
जब उत्तर प्रदेश की महिला आयोग यहां आईं थी, तब ट्रस्ट को कोई जानकारी नहीं दी गई थी। इसके बाद दूसरे दिन यहां से तीन वृद्धजनों को उनके परिवार को बिना सूचना दिए ही सरकारी वृद्धाश्रम में भेज दिया गया। जबकि उनमें से एक वृद्धजन के परिवार ने ट्रस्ट से पूछा है कि आखिर कोई कैसे उन्हें यहां से बिना जानकारी दिए ले जा सकता है। इसके बाद ट्रस्ट ने दावा किया है कि जिन तीन वृद्धजनों को प्रशासन ले गया था, उनमें से दो को वापस लाया गया, इनमें से एक आश्रम आए गए, वहीं दूसरे वृद्धजन के परिवार उन्हें अपने साथ ले गए।
महिला के हाथ बांधना गलती
ट्रस्ट की सचिव नीलम मिश्रा ने परिजनों को संबोधित करते हुए कहा कि जिस महिला के हाथ बंधे हुए का वीडियो वायरल हो रहा है, वह महिला दिमागी रूप से अस्वस्थ हैं। यह बात स्वयं उनके परिवार के लोगों ने लिखकर उन्हें दी थी।
हालांकि यह बात तब सामने आई जब यह मामला हाइलाइट हुआ। उन्हें यहां रहते हुए तीन-चार दिन ही हुए थे। उनके व्यवहार से यह सामने आया कि वह दिमागी रूप से अस्वस्थ हैं। जबकि आश्रम में दिमागी रूप से अस्वस्थ लोगों के रखने की कोई प्रावधान नही है। गलती से उन्हें रख लिया गया था, लेकिन इस बीच जब यह सामने आया कि केयर टेकर ने उनके हाथ बांध दिए हैं, तब उस केयर टेकर को काम से निकाल दिया गया।
हर एक-दो हफ्ते में ही बदलते हैं केयर टेकर, कुछ लंबे समय बाद
संवाद सहयोगी ने जब आश्रम में मौजूद केयर टेकर से बातचीत की तो उनमें से एक महिला केयरटेकर ने बताया कि उन्हें अभी यहां आए हुए दो दिन ही हुए हैं। इसी तरह दूसरी महिला केयर टेकर से बात की गई तो उन्होंने बताया कि उन्हें भी लगभग चार पांच दिन ही हुए हैं। ट्रस्ट का कहना है कि जो महिला या पुरुष काम की तलाश में उनके पास आते हैं, उन्हें वह रख लेते हैं।
ट्रस्ट संग बैठक के दौरान परिवारों ने जताया भरोसा
ट्रस्ट के अधिकारियों संग जब वृद्धजनों के परिवारों संग बैठक की तो सभी परिवारों ने ट्रस्ट पर भरोसा जताया। साथ ही कहा कि वह अपने-अपने परिवार के सदस्यों को कहीं दूसरी ओर शिफ्ट नही करना चाहते हैं। साथ ही करीब ऐसे 21 परिवार शामिल रहें, जिन्होंने अपनी रजामंदी की बात लिखित में पत्र तैयार कर ट्रस्ट को सौंपा है।
वृद्धजनों के परिवार से लेते हैं सिक्योरिटी फीस
ट्रस्ट के सदस्य अमरवीर सिंह ने बताया कि वह वृद्धजनों के परिवार से सिक्योरिटी फीस लेते हैं। ताकि वृद्धजनों की पूरी व्यवस्था को सुचारू रूप से संचालित रखा जाए। आश्रम में बेहतर क्वालिटी का खाना दिया जाता है। साफ सफाई की पूरी व्यवस्था दुरुस्त रखी जाती है।