बेवफाई करना या उसका आरोप लगाना जीवनसाथी के लिए मानसिक प्रताड़ना है और पति-पत्नी दोनों के लिये यह समान है। तलाक के मामले में पुनर्विचार याचिका पर फैसला सुनाते हुए यह टिप्पणी हाईकोर्ट ने की है। पति ने मानसिक प्रताड़ना के आधार पर तलाक मांगा था लेकिन निचली अदालत ने याचिका खारिज कर दी थी।
जस्टिस प्रदीप नंदराजोग व जस्टिस योगेश खन्ना ने याची के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा कि वैवाहिक विवाद के मामले में आरोप प्रत्यारोपों के कारण सचाई का पता लगाना बेहद मुश्किल होता है। दंपति में से कोई भी बेवफाई करे या दूसरे पर उसका आरोप लगाए यह दोनों के लिये समान है।
हाईकोर्ट ने निचली अदालत के 2012 के फैसले को खारिज करते हुए कहा कि दंपति की शादी दिसंबर 1992 में हुई थी और वह दिसंबर 2005 से अलग रहते हैं। दोनों को एक साथ रखने से भी कोई मकसद पूरा नहीं होगा।