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बढ़ेगा भारत-पाक की 'दोस्ती बस' का किराया

Tue, 16 Sep 2014 09:03 AM IST
सीमा शर्मा/अमर उजाला, नई दिल्ली
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सरहद से पहले अब दोस्ती का ब्रेकडाउन नहीं होगा, क्योंकि केंद्रीय गृह मंत्रालय की मांग पर भारत-पाकिस्तान दोस्ती की मिसाल लाहौर बस सेवा में पाकिस्तान टूरिज्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन में शामिल देवू कंपनी की 45 सीटर रॉयल लग्जरी नई बस (पाकिस्तानी बस का नाम दोस्ती) सोमवार रात 8:30 बजे पहली बार दिल्ली पहुंची।
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वहीं, अब लाहौर बस सेवा में यात्रा करने वाले लोगों को जल्द ही किराया बढ़ोतरी का झटका सहने के लिए तैयार रहना होगा। क्योंकि दोनों देशों के अधिकारियों ने किराया बढ़ोतरी का खाका तैयार कर लिया है। बस इस पर आलाकमान की सहमति का इंतजार है। वर्ष 2008 के बाद अब किराये में यह बढ़ोतरी होगी।

भारत-पाकिस्तान के बीच दोस्ती का पैगाम लेकर दौड़ने वाली बस सेवा की टिकट दरों में बढ़ोतरी होने जा रही है। पिछले किराये में हुई बढ़ोतरी को देखा जाए तो इस बार भी 200 से 300 रुपये की ही वृद्धि करने पर विचार हो रहा है।
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दिल्ली ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन और पाकिस्तानी टूरिज्म डेवलेपमेंट कॉरपोरेशन (पीटीडीसी ) के अधिकारियों की सोमवार को आईपी डिपो में सदा-ए-सरहद और दोस्ती का किराया बढ़ाने समेत अन्य मुद्दों पर चर्चा हुई। हालांकि  किराया कितना बढ़ाया जाना है, इस पर आखिरी मोहर भारतीय सरकार समेत पाकिस्तानी हाईकमान तय करेगा।

भारत सरकार की सख्ती से जागा पीटीडीसी
अमर उजाला ने पाकिस्तानी बस के बार-बार ब्रेकडाउन की खबर प्रमुखता से उठाई थी। इसके आधार पर डीटीसी ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को बस की जर्जर हालत के बारे में जानकारी थी कि बस संचालन से किसी दिन भारी जान-माल का नुकसान हो सकता है। भारत सरकार ने 2013 में पाकिस्तानी आलाकमान को जल्द बस बदलने को कहा था। बस तो मई में आ गई थी, लेकिन इंटरनेशनल परमिट की लंबी प्रक्रिया के अलावा पाकिस्तान में नवाज शरीफ के खिलाफ पाकिस्तान में चल रहे आंदोलन के चलते उद्घाटन का मामला रुका पड़ा था।  

30 सालों बाद रखा भारत की सरजमीं पर कदम
आपा, भांजे, भांजियों, भाभी व भाइयों से मिलते ही कराची की रहीजा खातून की आंखों से आंसुओं का सैलाब बह निकला। पिछले 30 सालों से अपने खून के रिश्तों से दूर रहने का दर्द लिए दो मुल्कों के परिवार सरहद समेत वीजा में जटिलता की बात कहकर अपना हाल बयान करते रहे।

कराची निवासी रहीजा खातून पुरानी दिल्ली की रहने वाली थीं। वह 30 साल पहले निकाह के बाद पाकिस्तानी की बहू बन गई थीं। शादी के बाद नाते-रिश्तेदारों से मिलना ही मुमकिन नहीं हो सका। अब लाहौर से चली नई बस से वह सोमवार को यहां पहुंची और अपनों से मिलीं।

कुछ शर्तों के साथ हुआ था समझौता
समझौते के समय तय हुआ था कि लाहौर में सदा-ए-सरहद की बुकिंग (भारतीय बस) का किराया पाकिस्तान अपने पास जमा करेगा और दिल्ली में दोस्ती (पाकिस्तानी बस) की बुकिंग का किराया डीटीसी एकत्र करेगी। इस दौरान यात्रियों के खाने-पीने का पूरी व्यवस्था दोनों देश अपने-अपने एरिया में स्वयं करेंगे।

साल भर के बाद दोनों देशों के ट्रांसपोर्ट अधिकारी अपनी-अपनी बसों के यात्रियों की बुकिंग और खर्चे का निपटारा करेंगे और आपस में हिसाब करेंगे। दोनों देशों के बीच चलने वाली बस सेवा 528 किलोमीटर का सफर तय करती है, जिसमें भारत की सीमा में 492 किलोमीटर तो पाकिस्तान में वाघा बॉर्डर से लाहौर 36 किलोमीटर दूर है। भारत का दावा है कि उनका पाकिस्तान पर डेढ़ करोड़ रुपये बुकिंग का बकाया है।
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