75 सीएम श्री स्कूल बनेंगे ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। राजधानी में सरकारी शिक्षा को वैश्विक स्तर तक ले जाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और सीएम रेखा गुप्ता ने सरोजिनी नगर स्थित सीएम श्री स्कूल का शुभारंभ किया। इसके अलावा दिल्ली में 75 सीएम श्री स्कूल परियोजनाओं की आधारशिला रखी गई। सरकार के अनुसार यह देश का पहला एआई-संचालित समग्र शिक्षा मॉडल है, जो क्लासरूम से लेकर ग्लोबल करियर तक छात्रों को तैयार करेगा। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप आधुनिक और तकनीक-आधारित शिक्षा व्यवस्था लागू करना समय की मांग है। उन्होंने दिल्ली सरकार को 75 स्कूलों को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करने की पहल के लिए बधाई दी। उनके अनुसार इन विद्यालयों में गरीब, सामान्य और मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों को निजी स्कूलों जैसी आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि सीएमश्री स्कूल केवल नए भवन नहीं, बल्कि दिल्ली के बच्चों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने का संकल्प हैं। इन स्कूलों में एआई आधारित स्मार्ट क्लासरूम, इंटरैक्टिव बोर्ड, डिजिटल कंटेंट और व्यक्तिगत सीखने की व्यवस्था होगी। सरकार 7,000 कक्षाओं को एआई-सक्षम स्मार्ट क्लासरूम में बदल रही है और 31 मार्च तक इन्हें पूरी तरह तैयार करने का लक्ष्य है। योजना के तहत प्रतियोगी परीक्षा जेईई, नीट, सीयूईटी, सीएलएटी और एनडीए की तैयारी अब सरकारी स्कूलों से ही शुरू कराई जाएगी। इसके लिए विशेष ऑनलाइन पोर्टल, नियमित टेस्ट और प्रगति मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित किया गया है। मल्टी-सेक्टोरियल स्किल लैब्स में रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजाइन और मेकाट्रॉनिक्स जैसे विषय सिखाए जाएंगे और 175 नई आईसीटी लैब्स में 7,000 कंप्यूटर उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जबकि 100 से अधिक डिजिटल लाइब्रेरी और 175 से ज्यादा लैंग्वेज लैब स्थापित की जा रही हैं।
दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि अब डिजिटल और तकनीक-सक्षम शिक्षा पूरी दिल्ली में समान रूप से उपलब्ध कराई जा रही है। उनके अनुसार यह मॉडल केवल परीक्षा परिणामों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि छात्रों को आईआईटी, मेडिकल कॉलेजों, विदेशी विश्वविद्यालयों और उद्यमिता के अवसरों तक पहुंचाने का माध्यम बनेगा। सरकार का दावा है कि यह पहल दिल्ली को वैश्विक शिक्षा मानकों के अनुरूप नई पहचान दिलाएगी।