नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने अपने हालिया फैसले में साफ किया है कि विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम (फेरा), 1973 के तहत भारतीय मुद्रा भी जब्त की जा सकती है, न कि केवल विदेशी मुद्रा। अदालत ने यह भी कहा कि इस तरह के मामलों में हाईकोर्ट में अपील सिर्फ कानूनी सवालों तक सीमित होती है, तथ्यों पर नहीं। यह फैसला न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद और न्यायमूर्ति विमल कुमार यादव की खंडपीठ ने अर्जुन पाटिल नामक व्यक्ति की अपील पर सुनाया।
पाटिल पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने साल 1997 में छापा मारकर 12.31 लाख रुपये की भारतीय मुद्रा, विदेशी मुद्रा, सोना और कुछ दस्तावेज जब्त किए थे। ईडी का आरोप था कि पाटिल ने नेपाल से सोना खरीदने के लिए विदेशी मुद्रा का अवैध रूप से इस्तेमाल किया, जो फेरा की कई धाराओं का उल्लंघन था।
पाटिल ने शुरुआत में यह बात मानी थी, लेकिन बाद में दावा किया कि यह बयान दबाव में लिया गया था। हाईकोर्ट ने कहा कि फेरा की धारा 63 के अनुसार कोई भी संपत्ति, चाहे वह भारतीय मुद्रा ही क्यों न हो, अगर किसी उल्लंघन से जुड़ी हो, तो जब्त की जा सकती है। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि हाईकोर्ट तथ्यात्मक मामलों में हस्तक्षेप नहीं कर सकता, क्योंकि यह अधिकार अपीलीय न्यायाधिकरण के पास है। अपील केवल कानून के प्रश्नों पर ही हो सकती है और यही नियम अब फेरा के उत्तराधिकारी कानून फेमा में भी लागू है। कोर्ट ने अर्जुन पाटिल की अपील खारिज करते हुए कहा कि जब्ती और जुर्माने का आदेश वैध था, और इसमें हस्तक्षेप की कोई जरूरत नहीं है। संवाद