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India Trade Fare: शजर पत्थरों में खुद बनती है प्रकृति की नायाब कारीगरी, इंसान भी नहीं समझ पाया करिश्मा

Sat, 26 Nov 2022 08:03 AM IST
अनुराग सक्सेना आदित्य पाण्डेय, नई दिल्ली

सार

यूपी पवेलियन में ‘शजर स्टोन क्राफ्ट’ के स्टॉल पर शजर पत्थरों से बना इंडिया गेट है। इसे पत्थरों के 50 हजार टुकड़ों से बनाया है। इसकी कीमत तीन लाख रुपये है। द्वारिका प्रसाद सोनी ने बेटे रवि शंकर सोनी के साथ मिलकर इसे करीब एक साल में बनाया है। एक हाउस बोट है। इसकी कीमत एक लाख रुपये है।
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ट्रेड फेयर में भीड़ - फोटो : अमर उजाला-फाइल फोटो
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विस्तार
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यूपी के बांदा जिले में केन नदी में पाए जाने वाले पत्थरों के भीतर प्रकृति खुद ब खुद नायाब कारीगरी करती है। इंसान इस अद्भुत कारीगरी को समझ नहीं पाया है कि पत्थरों के भीतर कैसे पेड़ पौधों और जीव जंतुओं के चित्र बनते हैं। ट्रेड फेयर में यूपी पवेलियन में शजर पत्थरों के रूप में इंसान को प्रकृति से मिली अनोखी भेंट उपलब्ध है। इसे यहां देखा और खरीदा जा सकता है। शजर पत्थरों को खोजने, तराशकर व इनसे बेशकीमती सामान बनाने का काम कर रहे राष्ट्रीय पुरस्कार पा चुके शिल्पकार द्वारिका प्रसाद सोनी ट्रेड फेयर में मौजूद हैं।

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यूपी पवेलियन में ‘शजर स्टोन क्राफ्ट’ के स्टॉल पर शजर पत्थरों से बना इंडिया गेट है। इसे पत्थरों के 50 हजार टुकड़ों से बनाया है। इसकी कीमत तीन लाख रुपये है। द्वारिका प्रसाद सोनी ने बेटे रवि शंकर सोनी के साथ मिलकर इसे करीब एक साल में बनाया है। एक हाउस बोट है। इसकी कीमत एक लाख रुपये है। इसे तीन महीने में बनाया है। इसके अलावा शजर पत्थरों से बनी अंगूठी, हार, ब्रेसलेट, ईयर रिंग, ब्रॉच, पैंडल सेट, चोकर, चाभी गुच्छा, चांदी की ट्रॉफी और 200 रुपये से लेकर 10000 रुपये तक के नग मौजूद हैं।

द्वारिका प्रसाद सोनी ने बताया कि शजर बहुमूल्य पत्थर है। ‘शजर’ फारसी शब्द है, जिसका हिंदी अर्थ छोटा पौधा है। ब्रिटिश इनसाइक्लोपीडिया में शजर को केन स्टोन कहा गया है। भारत में शजर पत्थर केवल बांदा में केन नदी में पाया जाता है। उन्होंने पत्थर के टुकड़ों से सबसे पहले कलिंजर पोर्ट बनाया था। फिर राष्ट्रीय उद्यान, ताजमहल और टेबल लैंप जैसी कृतियां तैयार कीं। राष्ट्रीय उद्यान बनाने के लिए उन्हें 2001 में यूपी सरकार ने राज्य पुरस्कार दिया और फिर टेबल लैंप बनाने के लिए 2011 में केंद्र सरकार ने भी इन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार देकर सम्मानित किया। उनका बनाया कलिंजर पोर्ट मौजूदा समय जयपुर संग्रहालय में रखा गया है।

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नूरां बहनों ने एंफी थियेटर में बांधा समा 
एंफी थियेटर में पंजाब राज्य की ओर से आयोजित रंगारंग सांस्कृति कार्यक्रम में नूरां बहनों से समां बांध दिया। दमादम मस्त कलंदर, कमली, पटाखा गुड्डी, दुनिया मतलब दी और फकीरा जैसे अपने कई लोकप्रिय गीतों को सुनकर थियेटर में मौजूद श्रोता गदगद हो गए। उनका उत्साह देखने लायक था। ‘दमादम मस्त कलंदर’ गीत के साथ तो सैकड़ो लोगों लोगों ने एक साथ तालियां बजाकर नूरां बहनों का साथ दिया और उनका मनोबल बढ़ाया।

भीड़ ने तोड़े रिकार्ड, 82000 लोग पहुंचे
ट्रेड फेयर में जुटी भीड़ ने इस साल के सारे रिकार्ड तोड़ दिए। शुक्रवार को करीब 82 हजार लोगों ने मेले का भ्रमण किया। बीते शनिवार को करीब 80 हजार लोग मेले में पहुंचे थे। शनिवार और रविवार को मेले में इससे भी अधिक भीड़ जुट सकती है। शुक्रवार को मेले में पंजाब और पश्चिम बंगाल दिवस था। इस दौरान इन दोनों राज्यों के पवेलियन की रौनक अन्य राज्यों की अपेक्षा ज्यादा थी। पश्चिम बंगाल पवेलियन में दोपहर राज्य की उद्योग मंत्री शशि पांजा और उद्योग सचिव वंदना यादव भी मौजूद रहीं।
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