पुन्हाना विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय विधायक रहीश खान ने शानदार सियासी दांव खेला है। उन्होंने प्रदेश में भाजपा की बनने वाली सरकार को अपना समर्थन दे दिया है। उनका यह समर्थन बिना किसी शर्त के है। मेवात जिले में भाजपा का कोई विधायक नहीं है। माना जा रहा है कि रहीश खान को अपने क्षेत्र के विकास के लिए एक प्लेटफार्म चाहिए जो उसे भाजपा के रूप में मिलने जा रहा है।
वहीं भाजपा को मेवात में अपना कद बढ़ाने के लिए एक कंधा चाहिए। ऐसे में दोनों के बीच सहयोग का जो सियासी वातावरण बन रहा है। वह दोनों पक्षों के हित में है। वैसे चुनावों से पहले ही रहीश खान ने अपने सारे विकल्प खोल दिये थे। उन्होंने कह दिया था कि अगर वह विधायक बनें तो जिस भी पार्टी की प्रदेश में सरकार बनेगी वह उसको अपना समर्थन देंगे। रहीशा खान का निर्दलीय चुनाव लड़ने का मकसद भी यही था।
वर्ष 2005 की कांग्रेस सरकार को नूंह से निर्दलीय जीते हबीबुर्रहमान ने और 2009 में हथीन से निर्दलीय जीते जलेब खान ने कांग्रेस सरकार को अपना समर्थन दिया था। इस कारण दोनों ने अपने-अपने क्षेत्र में काफी विकास कार्य कराया था। इस बार विधानसभा चुनाव में मेवात की जनता ने नूंह, फिरोजपुर झिरका और हथीन की सीट इनेलो को दी है। जबकी पुन्हाना सीट निर्दलीय रहीश खान के खाते में गई।
ऐसे में रहीश खान के पास विकास के लिए कोई और ठोस विकल्प नहीं बचा था। राजनीति के जानकारों का कहना है कि भाजपा रहीश खान को कोई बड़ी जिम्मेदारी सौंप सकती है। जिससे वह सिर्फ अपने ही क्षेत्र का नहीं बल्कि पूरे मेवात जिले का विकास कर सके।
क्या कहना है पुन्हाना के विधायक...
मेवात की जनता हमेशा सत्ता विरोधी जनमत देती रही है। वर्ष 2005 में जब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी तो मेवात की जनता ने सिर्फ फिरोजपुर झिरका की ही सीट कांग्रेस को दी थी। उस समय आजाद मोहम्मद कांग्रेस से विधायक चुने गए। वहीं 2009 में भी मेवात की जनता ने कांग्रेस के खाते में सिर्फ नूंह की सीट दी थी। इस कारण जो विकास हुआ वह सिर्फ नूंह में ही हो सका।
पुन्हाना से नवनिर्वाचित निर्दलीय विधायक रहीश खान ने कहा कि जब सत्ता पक्ष का विधायक नहीं होता है तो क्षेत्र का विकास नहीं हो पाता है। ऐसा वह पिछले दो बार से देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसी वजह से वह निर्दलीय चुनाव लड़ने का निर्णय लिया था।
खान ने कहा कि भाजपा को समर्थन देने के पीछे उसका मकसद पुन्हाना का विकास कराना है। उन्होंने कहा कि अगर भाजपा उन्हें कोई बड़ी जिम्मेदारी देती है तो वह उसे बड़ी इमानदारी के साथ निभाने का काम करेगें।
कौन है रहीश खान...
फिरोजपुर झिरका के गांव नीमखेड़ा के रहने वाले रहीश खान को राजनीति विरासत में मिली है। इनके पिता मरहूम अजमत खां 1987 में देवी लाल सरकार में पशुपालन मंत्री बने। इसके अलावा रहीश खान के बडे़ भाई आजाद मोहम्मद 1996 में बंसीलाल सरकार में मंत्री और 2005 की हुड्डा सरकार में डिप्टी स्पीकर बने।
रहीश खान ने राजनीति में अपना पहला कदम वर्ष 2005 के जिला परिषद् का चुनाव लड़ा वह जीते भी। फिलहाल वह मेवात कॉपरेटिव बैंक के डारेक्टर हैं। रहीश खान ने निर्दलीय उम्मीदवार की हैसियत से अपना पहला चुनाव वर्ष 2009 में लड़ा।
जिसमें उनको करीब 11 हजार वोट मिले थे। पुन्हाना से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर वर्ष 2014 के विधानसभा चुनाव में 3142 वोटों से रहीश खान ने अपने दिग्गज प्रतिद्वंदी मोहम्मद इलियास को हराया।