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आजादी के रखवाले: पूर्व सैनिक ने छेड़ी भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग

Thu, 09 Aug 2018 04:00 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, नोएडा
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captain vikas gupta
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‘अपनी आजादी को हम हरगिज मिटा सकते नहीं, सर कटा सकते हैं लेकिन सर झुका सकते नहीं...’। भारतीय सेना में रहकर दुश्मन देशों से मुकाबला करने वाले नोएडा के सेवानिवृत्त कैप्टन विकास गुप्ता अब इसी सोच के साथ भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग छेड़े हुए हैं।

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नोएडा का फार्म हाउस घोटाला हो या उत्तर प्रदेश की सुर्खियों में रहा एनआरएचएम घोटाला या फिर भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे नोएडा, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के पूर्व चीफ इंजीनियर यादव सिंह को लेकर नए-नए खुलासे। सेना के इस सेवानिवृत्त अधिकारी ने बेखौफ हर मोर्चे पर भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग में भूमिका निभाई। 

इटावा में जन्में विकास गुप्ता का मानना है कि 15 अगस्त 1947 को गुलामी की जंजीरों से भले ही देश आजाद हो गया हो, लेकिन भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और अशिक्षा से आजादी आज तक नहीं मिली है। सेवानिवृत्त होने के बाद भारतीय राजस्व सेवा में नियुक्ति हुई, लेकिन देश के लिए कुछ करने के जज्बे ने इस नौकरी में रहने नहीं दिया।
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स्वतंत्रता संग्राम सेनानी दादा सत्यदेव गुप्ता व नाना राजाराम गुप्ता की प्रेरणा से उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में आरटीआई को भी हथियार बनाया और एक के बाद एक मामले उजागर किए।

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इन मामलों को उठाया

इन मामलों को उठाया
- फॉर्म हाउस घोटाला 2011: औद्योगिक सेक्टर 153, 154 व 157 विकसित करने के नाम पर फॉर्म हाउस घोटाले का मामला उठाया। इसकी जांच लोकायुक्त को सौंपी गई।
- ग्रुप हाउसिंग मामला 2011: किसानों से सस्ती जमीन लेकर महंगे दाम पर बिल्डरों को बेचे जाने का मामला उठाया। इस मामले की जांच भी लोकायुक्त को सौंपी गई।
- निजी कंपनियों को जमीन आवंटन 2011: निजी कंपनियों को रातों रात जमीन के आवंटन का मामला उठाया।
- एनआरएचएम घोटाला 2011: एनआरएचएम घोटाले पूर्व मंत्री की भूमिका को उजागर किया। मामले की सीबीआई जांच हुई।
- यादव सिंह मामला 2014: तत्कालीन चीफ इंजीनियर यादव सिंह पर आयकर का शिकंजा कसने के बाद कारनामों का खुलासा। पीआईएल में भी सहयोगी बने। मामला सीबीआई के सुपुर्द।
- डीएनडी टोल मामला 2015: डीएनडी फ्लाईवे पर टोल वसूली के खिलाफ छेड़ी मुहिम। सरकार ने जांच के आदेश दिए। अदालत के आदेश पर टोल फ्री हुआ डीएनडी।
- आरटीआई मामला 2016: प्राधिकरण की नियुक्ति व पदोन्नति को लेकर आरटीआई का जवाब न दिए जाने पर हाल ही में बड़ी कार्रवाई। अधिकारी पर एक लाख रुपये का जुर्माना।
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