अंतरराज्यीय बसों के आवागमन की शुरुआत से यात्रियों को जहां राहत मिली है तो दूसरी तरफ पुराने डीजल वाहनों से प्रदूषण का खतरा भी मंडराने लगा है। दूसरे दिन भी वाहनों की संख्या कम होने की वजह भी पुरानी बसों को ही बताया जा रहा है। लॉकडाउन से पहले दिल्ली से रोजाना दूसरे राज्यों के लिए करीब 3500 बसों का रोजाना आवागमन हो रहा था।
बुधवार को संख्या में थोड़ी बढ़ोतरी जरूर हुई, लेकिन आनंद विहार बस अड्डा में अभी भी कुछ पुराने वाहन पहुंच रहे हैं। आनंद विहार के सामने कौशाम्बी बस डिपो तक अभी भी कई ऐसे वाहन पहुंच रहे हैं, ऐसे में हवा का रुख बदलने से दिल्ली में एक बार फिर प्रदूषण बढ़ने का खतरा मंडराने लगा है।
वाहनों से होने वाले प्रदूषण के बारे में विशेषज्ञ विवेक भट्टाचार्य का कहना है कि यूं तो सार्वजनिक वाहनों का परिचालन शुरू होने से निजी वाहनों का कम इसतेमाल होगा। लेकिन, दूसरे राज्यों से दिल्ली में प्रवेश करने वाले पुराने डीजल वाहनों की प्रदूषण जांच बेहद जरूरी है। परिवहन विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि दिल्ली में प्रवेश करने वाले वाहनों की लगातार निगरानी हो रही है। प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की जांच की जा रही है और मानकों का पालन न करने वाले वाहनों को प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा।