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यमुना में फिर से अमोनिया की मात्रा बढ़ने से जलापूर्ति प्रभावित, राघव चड्ढा बोले- जल्द होगा समाधान

Tue, 28 Jul 2020 01:57 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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यमुना - फोटो : अमर उजाला
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हरियाणा द्वारा प्रदूषित पानी छोड़े जाने के बाद यमुना के जलस्तर में अमोनिया की मात्रा बढ़ने के कारण सोमवार को राजधानी के उत्तरी, पश्चिमी, मध्य और दक्षिणी दिल्ली में जलापूर्ति पर असर पड़ा। इस वजह से कई इलाकों में गंदे पानी की भी शिकायत रही। इस संबंध में जल बोर्ड के उपाध्यक्ष राघव चड्ढा ने ट्वीट कर लोगों को जानकारी दी और उनसे पानी का सदुपयोग करने की अपील के साथ समस्या का जल्द समाधान करने का आश्वासन दिया।

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जल बोर्ड के एक अधिकारी के अनुसार, अधिक बारिश होने के कारण हरियाणा द्वारा यमुना में जो पानी छोड़ा गया है, उसमें प्रदूषक तत्वों की मात्रा अधिक है। वहीं, औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले गंदे पानी की वजह से भी यमुना में अमोनिया की मात्रा बढ़ी है। हालांकि, एनजीटी द्वारा गठित यमुना मॉनिटरिंग कमेटी द्वारा इस मुद्दे को लेकर दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी (डीपीसीसी) और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण कमेटी (सीपीसीसी) समेत उद्योग आयुक्त से रिपोर्ट मांगी गई है। कमेटी के दो सदस्यों बीएस साजवान और शैलजा चंद्र द्वारा दिल्ली और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण कमेटी के अध्यक्ष और उद्योग आयुक्त से तुरंत कार्रवाई कर कारणों का पता लगाने के लिए कहा गया है।

पिछले वर्ष नवंबर में भी यमुना कमेटी द्वारा दिल्ली और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण कमेटी समेत औद्योगिक आयुक्त को कार्रवाई करते हुए प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों को बंद करने के  लिए कहा गया था। इसके बाद केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण कमेटी ने कहा था कि घरों से निकलने वाले गंदे पानी में फास्फेट की अधिक मात्रा होने के कारण यमुना का जलस्तर मैला हो रहा है। गौरतलब है कि इससे पहले शुक्रवार को अमोनिया की मात्रा बढ़ने के कारण वजीराबाद, चंद्रावल और ओखला के जल शोधन संयंत्रों में पानी की आपूर्ति करने की क्षमता प्रभावित हुई थी।
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हरियाणा से आ रहे पानी की वजह से जल शोधन संयंत्र प्रभावित: सत्येंद्र जैन
यमुना के जलस्तर में अमोनिया की मात्रा बढ़ने पर स्वास्थ्य एवं जल मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा कि हरियाणा की ओर से औद्योगिक कचरे से प्रदूषित गंदे पानी की वजह से राजधानी के जल शोधन संयंत्र प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कहा कि हरियाणा द्वारा दूषित पानी छोड़े जाने के बाद यमुना के जलस्तर में अमोनिया की मात्रा बढ़ी है। सामान्य स्तर पर अमोनिया की मात्रा 0.8 पर पर्टिकुलेट मैटर (पीपीएम) होनी चाहिए, लेकिन अमोनिया की मात्रा बढ़ने के बाद यह दो पीपीएम तक पहुंच गई है। इस वजह से राजधानी की 25 फीसदी जलापूर्ति प्रभावित हुई है।

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