राजधानी की कमजोर परिवहन व्यवस्था पर ही सरकार के सम विषम फॉर्मूले को सफल बनाने का पूरा दारोमदार होगा। कारण सरकार के इस फैसले से पहले से ही अतिरिक्त बोझ तले दबे परिवहन व्यवस्था पर रोजाना करीब 20 लाखा यात्री और बढ़ जाएंगे।
इसमें दिल्ली एनसीआर के लोग शामिल होंगे। हालांकि सरकार मेट्रो की फ्रीक्वेंसी, स्कूल और अनुबंध परमिट की बसों को सड़कों पर उतारकर इस दबाव को कम करने की कोशिश में लगी है। फिर भी पीक आवर्स में इससे निपटना मुश्किल है। यह सरकार भी मानती है।
दिल्ली में डीटीसी और क्लस्टर स्कीम को मिलाकर कुल 6000 हजार बसें चल रही हैं। इस पर रोजाना औसतन 38 लाख से ज्यादा लोग सफर करते हैं। यात्रियों के इस बोझ से माने तो अभी भी डीटीसी के बेड़े में 4000 हजार बसें और चाहिए।
रोजाना 28 लाख से ज्यादा यात्री सफर करते हैं
इसी तरह मेट्रो में औसतन रोजाना 28 लाख से ज्यादा यात्री सफर करते हैं। पीक आवर्स (सुबह 8 से 11 और शाम 6 से 11) में मेट्रो हो या बस इसमें सफर करना जंग जीतने के बराबर है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पूरी कार्ययोजना का खाका पेश करते हुए इस बात को मानते हैं।
उन्होंने कहा कि उनकी सरकार बेहतर परिवहन व्यवस्था देने के लिए बाध्य है। फिर बगैर जनता की मदद के इसे सफल नहीं बना पाएंगे। उन्होंने कहा कि अगर पीक आवर्स में दिक्कत बढ़ती है तो इसे आगे बढ़ाना मुश्किल होगा। उन्होंने कहा कि दिल्ली में हम स्कूल और अनुबंध परमिटधारियों की मदद से 15 दिनों के लिए 5000 हजार अतिरिक्त बसें उतारेंगे। फिर भी हमें सहयोग चाहिए।
सरकार की ओर से तमाम छूट देने के बाद भी सम विषम फॉर्मूला में दिल्ली के 19.50 लाख निजी पेट्रोल व डीजल वाहन प्रभावित होंगे। एक अनुमान के मुताबिक रोजाना ऑड व इवन फार्मूला के तहत करीब दस लाख वाहन प्रभावित होंगे।
पूरे दिन मेट्रो की हर लाइन पर रहेगा पीक ऑवर्स जैसा हाल
अगर एक कार पर औसतन दो सवारी माने तो रोजाना 20 लाख लोग सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था से जुड़ जाएंगे। इसी तरह 4-6 लाख वाहन दिल्ली आते हैं या होकर गुजरते हैं। इसके यात्री भी सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था से जुड़ेंगे।
सरकार बसों की संख्या बढ़ाने के लिए स्कूल और अनुबंध परमिट की करीब 5000 बसें सड़क पर उतारेगी। मेट्रो की जो फ्रीक्वेंसी अभी सिर्फ पीक आवर्स में मिलती है वह पूरे दिन और सभी लाइन पर रहेगी।
ऑटो चालकों को सड़क पर उतारा जाएगा। पूछ ओ ऐप लांच किया है, जिससे मोबाइल से ऑटो बुक किया जा सके। टैक्सी परमिट की सभी केटेगरी की गाड़ियों को इससे बाहर रखा है।