तीस हजारी बवाल मामले की जांच में यह बात सामने आई है कि जब वकील लॉकअप तोड़ने की कोशिश कर रहे थे तो तीसरी बटालियन के जवानों ने अपनी एसएसआर, एमपी5 और ग्लोक पिस्तौल जैसे हथियारों को चलाने के लिए कॉक कर लिए थे। इसी दौरान उत्तरी जिले के तत्कालीन अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त हरेंद्र कुमार मौके पर पहुंच गए और उन्होंने पुलिसकर्मियों को रोक लिया था। हालांकि तब तक तीसरी बटालियन का जवान दो गोलियां चला चुका था।
दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के अनुसार मामले की जांच कर रही एसआईटी ने अब तक करीब 42 लोगों के बयान दर्ज कर लिए हैं। इनमें तीस हजारी कोर्ट के वेंडर, पुलिस जवान व वकील शामिल हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार तीस हजारी कोर्ट की फुटेज को गहनता से देखा जा रहा है और फुटेज से आरोपियों की पहचान की जा रही है।
एसआईटी सदस्यों के फुटेज से पता चला है कि लॉकअप की सुरक्षा में तैनात तीसरी बटालियन के जवानों ने पहले पेपर स्प्रे का इस्तेमाल किया था ताकि भीड़ को हटाया व तितर-बितर किया जा सके। इसके बाद वकील नहीं माने और लॉकअप का गेट तोड़ दिया तो तीसरी बटालियन के एएसआई ने हवा में दो गोलियां चला दी थीं। एक गोली लॉकअप के लोहे के एंगल से टकराकर वकील को लग गई थी।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार तत्कालीन अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त हरेंद्र ने देखा कि तीसरी बटालियन के पुलिसकर्मी अपने हथियार कॉक कर गोली चलाने को तैयार थे। वह पुलिस जवानों पर चिल्लाए और पीछे रहने के निर्देश दिए। उन्होंने बिना हथियारों के मौजूद पुलिसकर्मियों को आगे कर लिया था, जबकि हथियारों से लैस पुलिसकर्मियों को पीछे कर दिया था।
उन्नाव दुष्कर्म के आरोपी लॉकअप में थे
पुलिस सूत्रों के अनुसार तीस हजारी बवाल के दौरान लॉकअप में करीब 155 कैदी थे। बताया जा रहा है कि इनमें उन्नाव दुष्कर्म का आरोपी कुलदीप सेंगर भी मौजूद था। पुलिसकर्मियों ने घेराबंदी कर इन इन कैदियों को लॉकअप से निकाला था। लॉकअप में धुआं भर गया था। इससे पुलिसकर्मी व कैदियों को सांस लेने में परेशानी होने लगी।