गांव से जुड़ी हैं जड़ें
मुलायम सिंह यादव की जड़ें गांव से जुड़ी हुई हैं। 22 नवंबर 1939 को इटावा के सैफई में पैदा हुए मुलायम को उनके पिता सुघर सिंह पहलवान बनाना चाहते थे, लेकिन मुलायम ने राजनीति के अखाड़े में सफलता पाई। इटावा से ग्रेजुएशन किया और राजनीति शास्त्र में स्नातकोत्तर की पढ़ाई के लिए आगरा पहुंचे। छात्र राजनीति में सक्रिय हुए। राममनोहर लोहिया की समाजवादी विचारधारा से प्रभावित हुए और पहली बार तब उन्हें लोहिया का सानिध्य मिला जब 1966 में लोहिया इटावा पहुंचे थे। 1967 में लोहिया की पार्टी से चुनाव लड़ा और जीत का ताज पहना। लोहिया की मौत के बाद मुलायम ने चौधरी चरण सिंह की पार्टी 'भारतीय क्रांति दल' का दामन थाम लिया।
1989 में पहली बार बने मुख्यमंत्री
आपातकाल के समय वह मीसा में गिरफ्तार हुए और उन्हें जेल हो गई। 1979 में चौधरी चरणसिंह ने जब 'लोकदल' की स्थापना की तो मुलायम उसमें शामिल हो गए। 1989 का दौर आया तो जनता पार्टी में शामिल होकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। सात बार सांसद रहे मुलायम का राजनीतिक सफर बेहद घुमावदार रहा है। अटल बिहारी सरकार में रक्षा मंत्री की जिम्मेदारी संभालने वाले मुलायम सिंह यादव 1989 में पहली बार यूपी के मुख्यमंत्री बने।
कारसेवकों पर गोली चलाने का दिया था आदेश
यह 1990 का दौर था और भारत की राजनीतिक लड़ाई मंदिर-मस्जिद के फेर में आ गई थी। मुलायम सिंह यादव उस वक्त सूबे के मुख्यमंत्री थे। 30 अक्टूबर 1990 को बाबरी मस्जिद के लिए कार सेवकों पर गोली चलाने का आदेश दिया था।
मुलायम सिंह यादव ने 4 अक्तूबर 1992 को समाजवादी पार्टी की स्थापना की। तीन बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे मुलायम 1967 में पहली बार विधायक बने। कांग्रेस विरोध के दौर में 1977 में मंत्री बने। अयोध्या मुद्दे ने मुलायम को राजनीति के शिखर पर पहुंचा दिया। यही वह दौर था जब भाजपा के हिंदू शिखर पुरुष आडवाणी, रथ लेकर निकले थे। सोमनाथ से अयोध्या तक माहौल को हिंदुत्वादी करने का दौर था। सत्ता में वीपी सिंह बैठे थे। आडवाणी की रथ यात्रा उनके माथे पर बल खींच रही थी। आडवाणी को रोकने का भारी दबाव था। जब 23 अक्टूबर को बिहार में आडवाणी की गिरफ्तारी हुई उसके कुछ दिन बाद मुलायम ने कार सेवकों पर गोली चलाने का आदेश दे दिया।
मुलायम सिंह यादव व अखिलेश यादव।
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अखिलेश यादव को सौंपी कमान
2012 के चुनाव से पहले मुलायम ने बेटे अखिलेश यादव को उत्तर प्रदेश सपा की कमान सौंपी। इस तरह मुलायम की दूसरी पीढ़ी ने पार्टी में दस्तक दी और सूबे के सबसे युवा मुख्यमंत्री के तौर पर कमान संभाली। साल 2015 आते-आते सपा के भीतर की पारिवारिक कलह ने मीडिया में खूब सुर्खियां बंटोरी और इसके बाद पार्टी की कमान अखिलेश के हाथों में आ गई, चाचा शिवपाल यादव ने खुद की अलग पार्टी बना ली।
विवादों में भी रहे मुलायम सिंह यादव
मुलायम सिंह यादव जब यूपी के मुख्यमंत्री थे उन्होंने अलग उत्तराखंड की मांग को लेकर दिल्ली रैली में शिरकत करने आने वाले आंदोलनकारियों पर गोलियां चलवा दीं। यह 1994 की बात है। मुलायम सिंह यादव के आदेश के बाद पुलिस ने मुजफ्फरनगर के पास रामपुर तिराहे पर आंदोलनकारियों को घेर लिया और फायरिंग कर दी। यह घटना इतिहास में रामपुर तिराहा गोलीबारी कांड के नाम से मशहूर है। घटना में छह आंदोलनकारी मारे गए।
1995 को लखनऊ में हुए गेस्ट हाउस कांड ने मुलायम को न सिर्फ सत्ता से बेदखल किया बल्कि उनकी सियासत पर दाग भी लगा दिया। दरअसल, बसपा के समर्थन वापस लेने की घोषणा के बाद नाराज समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने मायावती को बंधक बना लिया। नौ घंटे बंधक बने रहने के बाद भाजपा नेता लालजी टंडन ने अपने समर्थकों से साथ वहां पहुंचकर मायावती को वहां से सुरक्षित निकाला।