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सुब्रह्मण्यम स्वामी को VC बनाने के नाम पर JNU छात्र संघ में उबाल

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भाजपा के वरिष्ठ नेता व जाने माने वकील सुब्रह्मण्यम स्वामी को जेएनयू का वाइस चांसलर (कुलपति) बनाए जाने की तैयारियों का समाचार आने के बाद जेएनयू छात्र संगठन के अलावा लेफ्ट से जुड़े छात्र संगठनों ने विरोध शुरू कर दिया है।
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बुधवार रात को इस संबंध में बैठक आयोजित होने के बाद बृहस्पतिवार को यूजीसी के बाहर प्रदर्शन का निर्णय लिया गया। एफटीआईआई में गजेंद्र चौहान की नियुक्ति के आंदोलन की तर्ज पर ही सुब्रह्मण्यम की नियुक्ति के विरोध का निर्णय लिया गया है।

जेएनयू छात्र संघ की उपाध्यक्ष शेहला की तरफ से बुधवार देर रात जारी बयान में कहा गया कि आज एक मीडिया रिपोर्ट में लिखा है कि स्वामी को एमएचआरडी जेएनयू का अगला वीसी बनाना चाहती है।
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कुलपति बनाए जाने की संभावना

लेकिन जेएनयू छात्र संघ ऐसा किसी भी कीमत पर नहीं होने देगा। यदि ऐसा हुआ तो एफटीआईआई जैसा विरोध मोदी सरकार को झेलना पड़ेगा। स्वामी को यहां का वीसी बनाने के पीछे आरएसएस की हिंदू विचारधारा की सोच काम कर रही है।

जेएनयू सोशल जस्टिस, जेंडर जस्टिस व रिसर्च के लिए अपनी साख रखता है, जबकि आरएसएस की विचारधारा विश्व के इस प्रतिष्ठित संस्थान के मूल्यों का पतन करना चाहती है।

2011 में हावर्ड यूनिवर्सिटी में स्वामी के लेक्चर से भी पता चलता है कि इस प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय को उनके आने पर खतरा होगा।
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सुब्रह्मण्यम स्वामी हो सकते हैं

गौरतलब है ‘अमर उजाला’ ने 23 सितंबर के अंक में ‘सुब्रह्मण्यम स्वामी हो सकते हैं जेएनयू के अगले वीसी’ समाचार को प्रकाशित किया था। इसके बाद से लाल दुर्ग माने जाने वाले जेएनयू कैंपस में हड़कंप मच गया।

बैठकों के कई दौर चलने के बाद आखिरकार जेएनयू छात्र संघ ने इसे लेकर मोर्चा संभाल लिया है। लेकिन तमाम लेफ्ट विचारधारा के संगठन इस मामने में छात्र संघ के साथ खड़े हैं।

सूत्रों का कहना है कि शिक्षक वर्ग भी इसके विरोध में छात्रों के साथ आ सकता है। ज्ञात हो कि 14 वर्षों के बाद इस बार लाल दुर्ग में एबीवीपी को भी सहसचिव पद पर वापसी का मौका मिला है।
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