बावजूद नोएडा पुलिस ने बृहस्पतिवार को बदमाशों की गिरफ्तारी की झूठी कहानी बनाकर मीडिया के सामने प्रस्तुत कर दी। गौतमबुद्धनगर के एसएसपी लव कुमार ने बदमाशों को पकड़ने वाली पुलिस टीम के लिए 25 हजार रुपये का पुरस्कार भी घोषित कर दिया।
वहीं एपेरल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (एईपीसी) के नोएडा अध्यक्ष ललित ठुकराल ने भी पुलिस टीम के लिए 50 हजार रुपये के पुरस्कार की घोषणा कर दी।
हालांकि, वारदात में शामिल मुख्य आरोपी सतेंद्र समेत दो बदमाश अब भी फरार हैं। वहीं, फैक्ट्री मालिक राजीव शर्मा ने कहा कि वह आशुतोष के परिवार की पूरी मदद करेंगे।
नियमानुसार उसके बीमा की रकम भी परिवार को दी जाएगी। अगर आशुतोष के परिवार में कोई फैक्ट्री में काम करने वाला होगा तो उसे स्थायी नौकरी भी दी जाएगी।
मालूम हो कि गारमेंट फैक्ट्री में गार्ड आशुतोष की हत्या 14 जनवरी की शाम को गोली मारकर हुई थी। बदमाश यहां से लोहे की दो भारी-भरकम तिजोरी चोरी कर ले गए थे, जिसमें लगभग आठ लाख रुपये रखे थे।
मामले में नोएडा पुलिस ने प्रताप नगर जलालाबाद शाहजहांपुर निवासी भोला उर्फ शिवम (23), सलेमपुर जेतीपुर शाहजहांपुर निवासी सुनील सिंह (35) और आका खेड़ा जलालाबाद निवासी रंजित वर्मा (21) को गिरफ्तार किया है।
इनके पास से पुलिस को तीन तमंचे, 10 कारतूस, एक बाइक, लूटी गई एक तिजोरी, 318500 रुपये, 125 सिक्के विदेशी मुद्रा, एक सैमसंग टीएफटी, एक फिलिप्स एलईडी, खून से सना एक स्वेटर और फैक्ट्री से लूटे गए कुछ कपड़े बरामद हुए हैं।
एसपी सिटी अरुण कुमार सिंह ने बताया कि लूट की साजिश फैक्ट्री में रात के वक्त तैनात रहने वाले गार्ड सीबी सिंह के भाई सतेंद्र ने रची थी। वह फैक्ट्री का पुराना गार्ड है। प्रबंधन ने उसे नौकरी से निकाल दिया था।
सीबी सिंह की लूट में कोई भूमिका नहीं है। उसी ने फैक्ट्री में लगे सीसीटीवी कैमरे की रिकॉर्डिंग से वारदात में शामिल अपने भाई सतेंद्र की पहचान की थी।
सतेंद्र बमरौली कांट शाहजहांपुर का रहने वाला है। उसके अलावा गांधीनगर जलालाबाद निवासी अनमोल गुप्ता की भी पुलिस को तलाश है। आरोपियों ने वारदात से पहले फैक्ट्री में सतेंद्र के साथ शराब भी पी थी।
एसपी सिटी ने बताया कि सतेंद्र और आशुतोष अक्सर मिलते थे। सतेंद्र फैक्ट्री आता-जाता था। उसने पहले लूट के लिए भांजे उदयवीर को लड़कों का इंतजाम करने को कहा।
उदयवीर ने खुद वारदात करने से मना कर दिया, लेकिन उसने अपने दोस्त भोला को सतेंद्र की साजिश के बारे में बताया। इसके बाद भोला ने सतेंद्र से संपर्क कर सुनील, रंजित और अनमोल को वारदात में शामिल किया।
इन लोगों ने पहले 7 जनवरी को वारदात की योजना बनाई थी। काफी प्रयास के बाद भी इन्हें उस दिन तिजोरी ले जाने के लिए लोडर नहीं मिला। इसके बाद 13 जनवरी को सुनील ने फरीदाबाद से अपने एक परिचित का लोडर चोरी किया और 14 जनवरी को वारदात को अंजाम दिया गया।
सुनील ने पहले परिचित से लोडर किराए पर देने को कहा था, लेकिन उसने मना कर दिया था। फैक्ट्री में लूट के बाद आरोपियों ने लोडर खोड़ा पुश्ता पर खड़ा किया और वहां से ईको गाड़ी बुक कर दोनों तिजोरी शाहजहांपुर ले गए।
15 जनवरी को खोड़ा पुलिस ने लोडर लावारिस में बरामद कर फरीदाबाद पुलिस को सौंप दिया। उधर, बदमाशों ने गांव में तिजोरी ले जाकर उसे छेनी-हथौड़ी से काट दिया और उसमें रखी रकम आपस में बांट ली।
एसपी सिटी ने बताया कि आरोपियों ने फैक्ट्री के एक कमरे में आशुतोष के हाथ-पैर व मुंह बांधकर लूटपाट की। दोनों तिजोरी, एलईडी टीवी और कंप्यूटर मॉनिटर लोडर में रखकर बदमाश बैठकर निकलने वाले थे।
तभी अचानक सतेंद्र के दिमाग में आया कि आशुतोष उसे पहचानता है। इससे वह पकड़ा जा सकता है। इसके बाद सतेंद्र अन्य आरोपियों के साथ फैक्ट्री में दोबारा आया और आशुतोष की पीठ पर गोली मार दी।
एसपी सिटी के अनुसार हो सकता है कि आशुतोष भी वारदात में शामिल हो, इसका पता सतेंद्र की गिरफ्तारी के बाद चलेगा।