गाजियाबाद निवासी एस. चौहान ने नोएडा के सेक्टर-78 स्थित नए हाउसिंग प्रोजेक्ट में फ्लैट बुक कराया। चार साल के इंतजार के बाद दिसंबर 2015 में बिल्डर ने उनको फ्लैट पर पजेशन देने का वादा किया। अमित ने इसे ध्यान में रखते हुए अपनी बेटी का दाखिला रेयान इंटरनेशनल स्कूल में करवा दिया। दाखिले में मोटी रकम भी खर्च कर दी। दिसंबर से अप्रैल बीत गया, अब तक उनको फ्लैट पर पजेशन नहीं मिला। वे गाजियाबाद से नोएडा शिफ्ट नहीं कर सके।
अब गाजियाबाद से रोजाना सुबह स्कूल छोड़ने और दोपहर में बेटी को रिसीव करने नोएडा आते हैं। इससे उनको अपनी ड्यूटी करनी मुश्किल हो गई है। बिल्डर पजेशन की कोई तिथि भी नहीं बता रहा। बिल्डरों से परेशान होने वाले चौहान अकेले नहीं हैं, बल्कि ऐसे तमाम फ्लैट खरीदार मिल जाएंगे, जिन्होंने बिल्डर से फ्लैट पर पजेशन देने की तिथि के आधार पर प्लान बना लिया और अब पछताना पड़ रहा है।
रजिस्ट्री विभाग के डीआईजी (सेवानिवृत्त) वीडी शर्मा कहते हैं कि नए प्रोजेक्ट में पैसा लगाने वाले खरीदारों के साथ इस तरह की दिक्कतें आती हैं। इसलिए वे मौजूदा हालात में नए के बजाय पुराने प्रोजेक्ट में पैसा लगाना ज्यादा समझदारी मानते हैं। खासतौर पर रेडी टू मूव की प्रॉपर्टी खरीदना ज्यादा बेहतर है।
उनका कहना है, कि नोएडा-ग्रेटर नोएडा में बीते दिनों कई ऐसी घटनाएं हुई हैं, जिनकेबारे में पहले से कोई अनुमान नहीं था। इस वजह से फ्लैट बुक कराने वालों को परेशानी हुई। ऐसे में रेडी टू मूव या जिनका निर्माण पूरा होने वाला हो, उन प्रोजेक्ट में फ्लैट खरीदने से ये दिक्कतें नहीं झेलनी पड़ती हैं। ऐसे में प्रोजेक्ट में पैसा लगाने पर नक्शा पास व 20 जगहों से मिलने वाली अनुमति की छानबीन करने की जरूरत नहीं रहती। इसके अलावा निर्माण की गुणवत्ता व कागजात में क्या था और मौके पर क्या बना है ये सब भी आसानी से पता चल जाता है।
कीमतों में बहुत फर्क नहीं
रियल एस्टेट में मंदी के कारण नोएडा-ग्रेटर नोएडा में नए प्रोजेक्ट और रेडी टू मूव की कीमत में भी बहुत फर्क नहीं है। ग्रेटर नोएडा वेस्ट में नए और रेडी टू मूव फ्लैटों की कीमत 3500 से 4000 रुपये प्रति वर्ग फुट है। ग्रेटर नोएडा में भी लगभग यही कीमत है। नोएडा में 4200 से 5200 रुपये प्रति वर्ग फुट के आसपास कीमत चल रही है। दिक्कत सिर्फ इस बात की हो सकती है कि रेडी टू मूव में पूरा पैसा एक साथ देना पड़ेगा, जबकि नए प्रोजेक्ट में भुगतान के लिए ज्यादा वक्त मिल जाता है।
‘नए खरीदारों के लिए यह सही मौका है। काफी समय से दरें नहीं बढ़ी हैं। नए और प्रोजेक्ट और रेडी टू मूव फ्लैटों की कीमत भी लगभग समान है। किराया भरने की बजाय फ्लैट खरीदकर उसकी किस्त भरना ज्यादा बेहतर रहेगा।’
संजीव वार्ष्णेय, एमडी प्रॉप लेवरेज कंसलटेंट
नए प्रोजेक्ट में फ्लैट खरीदना हो तो इन बातों का रखें ख्याल :-
1. सबसे पहले बिल्डर की गुडविल के बारे में पता कर लें। यह जानकारी पूर्व में बनाए गए प्रोजेक्ट से मिल जाएगी।
2. भूमि का टाइटल क्या है। आवंटन किसके नाम है, रजिस्ट्री किसके नाम पर है। उसका नक्शा पास हुआ है या नहीं।
3. सुपर एरिया व कॉमन एरिया का अनुपात क्या है। इससे पता चल जाएगा कि कारपेट एरिया कितना मिलेगा।
4. बिल्डर फ्लैट के साथ क्या-क्या सुविधाएं दे रहा है, जिनमें सड़क कितनी चौड़ी है, क्लब, प्ले ग्राउंड, पार्क, स्वीमिंग पूल, वॉकिंग ट्रैक आदि शामिल हैं।
5. बिल्डर ने कब्जा देने के लिए कितना समय लिया है, क्योंकि कब्जा जितना देरी से मिलेगा, उसकी लागत उतनी बढ़ जाएगी। अगर बिल्डर समय पर कब्जा नहीं दे पाता है तो क्या शर्तें तय की गई है।
6. पेमेंट का प्लान क्या है, कितना पैसा कब-कब दिया जाना है।
7. अधिकतर खरीदार बैंक से कर्ज लेकर फ्लैट खरीदते हैं। बुकिंग से पहले यह देख लेना चाहिए कि बिल्डर ने किन बैंकों को लोन की अनुमति दे रखी है।
8. हिडन चार्जेज क्या हैं। इसमें क्लब की सदस्यता शुल्क, पानी व बिजली कनेक्शन चार्जेज, लीज रेंट आदि शामिल हैं