दो अक्तूबर 2014 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में स्वच्छता अभियान की शुरुआत की। हरियाणा में भी जोरशोर से मंत्री से लेकर आला अधिकारियों ने इसे हाथों-हाथ लिया, लेकिन दो साल बीत जाने के बाद भी शहर में स्वच्छता की स्थिति नहीं बदली है।
हालांकि मामूली सा बदलाव लोग स्वीकार करते हैं। यह हम नहीं, बल्कि लोकल सर्कल डॉट कॉम के सर्वे में खुलासा हुआ है।
लोकल सर्कल डॉट कॉम ने स्वच्छता अभियान के दो वर्ष पूरा होने के उपलक्ष्य में देश के सभी राज्यों में सर्वे किया।
जिसमें हरियाणा के तीन शहर फरीदाबाद, गुड़गांव और बहादुरगढ़ को शामिल किया। औसतन हर शहर से 15 हजार लोग शामिल हुए थे।
प्रदेश के तीन शहरों में सबसे बदतर हालत बहादुगरगढ़ में मिली है। लोगों का मानना है कि दो वर्षों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। 100 फीसदी लोगों का जवाब नकारात्मक रहा।
गुड़गांव में जवाब 50-50 का रहा है। 50 फीसदी लोगों का कहना है कि थोड़ा बदलाव हुआ है, लेकिन नाकाफी है और बदलाव की जरूरत है। जबकि 50 फीसदी लोगों का मानना है कि कोई बदलाव नहीं हुआ है।
बता दें कि स्वच्छता अभियान के बाद शहरी विकास मंत्रालय द्वारा स्वच्छता के आधार पर वर्ष 2014 के टॉप-476 शहरों को रैंकिंग दी गई थी, जिसमें गुड़गांव को 466 रैंकिंग मिला था।
2015 के टॉप-100 शहरों में 36वां रैंक रहा था। वहीं, फरीदाबाद में 40 फीसदी लोगों को कुछ बदलाव दिखता है और 60 फीसदी मानते हैं कि स्वच्छता की स्थिति बदतर है।
अभियान से बदला है नजरिया
इस सर्वे में अभियान की वजह से नजरिया में बदलाव की बात सामने आई है। 51 फीसदी लोगों ने स्वीकार किया कि उनके बच्चे अब स्वच्छता के प्रति जागरूक हैं और वो अपने घर में भी इसका पालन करते हैं। वहीं, 20 फीसदी लोगों ने माना कि स्वच्छता अभियान का प्रभाव पड़ा है, लेकिन इसका अमल नहीं हो पा रहा है।
15 हजार लोगों ने लिया था हिस्सा
लोकल सर्कल के मुताबिक प्रत्येक शहर से 15 हजार से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया है। इसमें 62 फीसदी पुरुष और 38 फीसदी महिलाएं शामिल थे। सभी से अलग-अलग विषयों को लेकर प्रश्र पूछे गए थे। जिसके विश्लेषण के आधार पर रिपोर्ट तैयार की गई है।