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ग्रेटर नोएडा पर खर्च होंगे 3639 करोड़ रुपये, प्राधिकरण की 112वीं बोर्ड बैठक में लगी मुहर

Sat, 07 Jul 2018 11:22 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
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Noida Authority
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लंबे इंतजार के बाद शनिवार को ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की 112वीं बोर्ड बैठक में 2018-19 के बजट पर मुहर लग गई। 3639 करोड़ रुपये के कुल बजट में पहली बार जेवर एयरपोर्ट के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। साथ ही, मेट्रो पर 135 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
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बोर्ड बैठक के बाद प्रेसवार्ता में प्रदेश के मुख्य सचिव व ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के चेयरमैन डॉ. अनूपचंद्र पांडेय व सीईओ पार्थसारथी सेन शर्मा ने बताया कि नोएडा-ग्रेटर नोएडा मेट्रो के लिए 135 करोड़ रुपये नोएडा मेट्रो रेल कारपोरेशन के जरिये खर्च होगी। वहीं, जेवर एयरपोर्ट के लिए बने कोष में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के अंशदान के रूप में 100 करोड़ रुपये जमा किए जाएंगे।

विकसित होने वाले सेक्टरों के अंदर व बाहर के विकास कार्यों पर 300 करोड़ रुपये खर्च होंगे। प्राधिकरण के विशेष प्रोजेक्ट नाइट सफारी, मेडिकल कॉलेज व जीबीयू आदि पर 358 करोड़ रुपये खर्च होंगे। प्राधिकरण से निर्मित होने वाले भवनों पर 372 करोड़ रुपये और रखरखाव पर 267 करोड़ रुपये खर्च करने का प्लान है। शहर की हरियाली पर 20 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
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जमीन अधिग्रहण के लिए 1000 करोड़
वित्तीय वर्ष 2018-19 के बजट का बड़ा हिस्सा भूमि अधिग्रहण के लिए रखा गया है। इस साल जमीन खरीदने में 1000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। जानकार बताते हैं कि पिछले साल जमीन का अधिग्रहण बहुत कम हुआ है। करीब 186 करोड़ रुपये ही खर्च हुए थे। उसे ध्यान में रखने पर यह बजट भी काफी है।  

ग्राम विकास पर लोस चुनाव का असर
इस साल ग्रामीण विकास पर लोकसभा चुनाव का असर दिख रहा है। बीते वित्तीय वर्ष में 114 करोड़ रुपये का बजट रखा गया था, जिसमें सिर्फ 24 करोड़ रुपये ही खर्च हुए, फिर भी इस साल 184 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है, जबकि अभी किसी भी साल में ग्रामीण विकास पर 100 करोड़ रुपये से अधिक खर्च नहीं हुआ है।

बजट पर दिख रही आर्थिक तंगी की झलक
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की आर्थिक तंगी की झलक बजट पर दिख रही है। पिछले वित्तीय वर्ष में प्रस्तावित बजट करीब 6443 करोड़ रुपये रखा गया था। हालांकि, खर्च 1745 करोड़ रुपये ही हुए यानी करीब एक चौथाई ही खर्च हो सका था, लेकिन इस साल तो प्रस्तावित बजट ही करोड़ 3639 रखा गया है। पिछले साल बजट न खर्च हो पाने की बड़ी वजह लखनऊ में सत्ता बदलने और फिर प्राधिकरणों में सीएजी जांच को बताया जा रहा है।

आवंटियों से 4040 करोड़ पाने का लक्ष्य
खर्च के साथ ही ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण बोर्ड ने विभिन्न स्रोतों से होने वाली आमदनी का भी लेखाजोखा प्रस्तुत किया। कुल 4846 करोड़ की प्राप्ति का आकलन है, जिसमें जमीन आवंटन के एवज में 4040 करोड़ रुपये आवंटियों से मिलने का अनुमान है। इनमें सबसे अधिक बिल्डरों से मिलने का अनुमान है। बिल्डरों से करीब 2000 करोड़ रुपये की प्राप्ति का आकलन है। हालांकि वित्तीय वर्ष 2017-18 में सिर्फ 710 करोड़ रुपये ही मिले हैं। बता दें कि बिल्डरों पर 6614 करोड़ रुपये बकाया है। इसके अलावा पूंजीगत प्राप्तियां, ऋण, अग्रिम भुगतान व अन्य राजस्व स्रोतों से भी आमदनी का आकलन है।
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