शिकायत में कहा गया था कि अस्पताल में साइको किलर नरेश द्वारा जब उसकी भाभी अंजुम की हत्या की गई, उस समय सारा स्टाफ अस्पताल में मौजूद था, लेकिन उसके शोर मचाने पर भी किसी स्टाफ ने उसकी सहायता नहीं की और आरोपी नरेश को पकड़ने का प्रयास नहीं किया।
पुलिस ने उस शिकायत के आधार पर अस्पताल संचालक तीन डाक्टरों सहित स्टाफ के अन्य18 लोगों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया था। अस्पताल के डाक्टरों ने ही नहीं जिले के अन्य निजी अस्पतालों के संचालकों ने भी पुलिस द्वारा की गई इस कार्रवाई को गलत बताया था।
आइएमए के प्रधान डा. गुलशन अरोड़ा का कहना है कि इस तरह तो कोई भी डाक्टर सुरक्षित नहीं है। उन्होंने मांग की है कि मुकदमा रद्द किया जाए। शनिवार को जब इस मुद्दे पर डाक्टरों के वकील ने अदालत के समक्ष अग्रिम जमानत की अर्जी लगाई तो अदालत ने जांच अधिकारी जयराम को तलब किया तथा जल्द से जल्द इस मामले की जांच रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए।
उधर इस मामले में पुलिस महानिरीक्षक सीएस राव का कहना है कि मामला दर्ज किया गया है, कार्रवाई नहीं की गई। जांच की जा रही है। जांच के आधार पर जो भी हालात सामने आएंगे, उसी आधार पर कार्रवाई की जाएगी।