दिल्ली से सटे तिलपत गांव की आबादी 7 हजार (2001 की जनगणना के मुताबिक) से ज्यादा है। इस गांव को फरीदाबाद के सांसद एवं केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर ने गोद लिया हुआ है, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि नोटबंदी के चलते सांसद का यह गांव बुरे दौर से गुजर रहा है।
नकदी के संकट से जूझ रहे आम आदमी को डिजिटल बनने का सबक जरूर दिया जा रहा है, लेकिन सांसद के गांव में लोगों के हाथ छह दिन से खाली हैं। ग्रामीणों को ऑनलाइन ट्रांजिक्शन की कोई जानकारी नहीं है। यहां के लोगों को न एटीएम का पता है और न ही पेटीएम का। डिजिटल इंडिया तो बहुत दूर की बात है।
यह हाल एनसीआर के फरीदाबाद जिले के तहत आने वाले गांव का है। इससे जिले के अन्य गांवों का अंदाजा खुद ब खुद लगाया जा सकता है। अमर उजाला संवाददाता गांव पहुंचे तो रास्ते में मायूस खड़े सोनू सिंह ने रुआंसे मन से कहा ग्रामीणों को डिजिटल बनाने के लिए आज तक कुछ नहीं किया गया।
गांव के एक मात्र बैंक से लोगों को पैसा नहीं मिल रहा है। सांसद गांव में आकर यहां के लोगों की स्थिति तो देखें। लोग सुबह से शाम तक कतार में खड़े रहते हैं। यहां ऑनलाइन भुगतान के बारे में किसी को जानकारी नहीं है। गांव में कई लोगों से बात की गई, सबका यही हाल था। छात्रों से लेकर युवाओं, यहां तक की शिक्षकों को भी वाट्सएप के अलावा किसी और ऐप की जानकारी नहीं थी।
छह दिन से बैंक खाली
गांव में एक मात्र बैंक है, जहां पिछले छह दिन से लोग पैसा निकालने के लिए घूम रहे हैं। अब तो गांव की महिलाएं अपने नंबर के इंतजार में बैंक के बाहर सुबह से आकर बैठ जाती हैं। बैंक खुले तो ठीक नहीं तो यहीं से वापस लौट अगले दिन बैंक में पैसा आने की उम्मीद लिए फिर आ जाती हैं। सांसद द्वारा गोद लिए गांव में यह स्थिति है, तो इससे अन्य स्थानों की स्थिति का पता लगाया जा सकता है।
विद्यार्थी जानते हैं पर काम करना नहीं आता
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के छात्रों ने बताया कि घर में मोबाइल फोन है, एटीएम है, लेकिन ऐप से ऑनलाइन भुगतान कैसे होता है। इसके बारे में नहीं पता है। पेटीएम के बारे में सुना है पर काम कैसे होता है नहीं पता है। छात्र कन्हैया ने बताया कि पीएम मोदी ने मन की बात में डिजिटल ट्रांजेक्शन के बारे में जो कहा है। अब सीखने की तैयारी कर रहे हैं।
हम तो पढ़े लिखे नहीं है तो कैसे करेंगे काम। पैसा कैसे खाते में आएगा नहीं पता है। मुझे तो फोन उठाना और कैंसल करना आता है। बच्चों से पूछना पड़ेगा।- संतोष कुमार शर्मा
हम तो पिछले छह दिन से बैंक आ रहे हैं। बस लाइन में लग रहे हैं। पैसा तो मिल नहीं रहा है। सांसद को गांव आकर स्थिति देखनी चाहिए। ऐसे कैसे डिजिटल होगा।- जयशंकर तिवारी
पेटीएम को एक दो बार यूज किया है, रिचार्ज करने के लिए। तब तो आसान था। अब पैसा कैसे देना पड़ता है, यह सीखना पडे़गा।- बिलाल
पिछले चार दिन से तो लोगों को बैंक से पैसा नहीं मिल रहा है। बीच में भी यही स्थिति थी। गांव में सांसद तो आ नहीं रहे हैं। लोगों को डिजिटल पेमेंट के बारे में कोई जानकारी नहीं है।- नंद किशोर, सरपंच, तिलपत गांव