दिल्ली सरकार द्वारा शालीमार बाग स्थित मैक्स अस्पताल का लाइसेंस रद्द किए जाने के बाद शनिवार को अस्पताल में ओपीडी व इमरजेंसी पूरी तरह से बंद रही।
पहले से डॉक्टरों को दिखाने की डेट लेने वाले मरीज अस्पताल पहुंचे, लेकिन अस्पताल प्रशासन ने सरकार के आदेश का हवाला देकर उनके इलाज से इनकार कर दिया। ऐसे में मरीजों व उनके परिवार के सदस्यों ने हंगामा भी किया। उधर, अस्पताल में पहले से भर्ती मरीजों को इलाज मिला।
शनिवार को अस्पताल में काफी मरीज ओपीडी में दिखाने आए, लेकिन ओपीडी व इमरजेंसी बंद होने से उनको काफी परेशानी हुई। काफी मरीज तो ऐसे थे जिनका इलाज काफी अरसे से चल रहा था और महीनों पहले से अप्वाइंटमेंट लेकर रखा था।
अस्पताल प्रशासन ने सरकार के आदेश का हवाला देकर उनको वापस भेज दिया। ऐसे में मरीजों के परिजनों ने मैक्स अस्पताल में हंगामा शुरू कर दिया। मरीजों का कहना था कि जब पहले से इलाज चल रहा है, उनको तो देखो, नए मरीज न भर्ती करो। मरीजों के हंगामे के चलते कई बार मारपीट तक की नौबत आई।
मरीजों व उनके परिवार के सदस्यों में सरकार के प्रति भी रोष था। उनका कहना था कि बच्चों की मौत का दुख है, लेकिन सरकार को पूरे अस्पताल का लाइसेंस रद्द करने की अपेक्षा दोषी डॉक्टरों का लाइसेंस रद्द कर कार्रवाई करनी चाहिए थी। इससे आम मरीजों को तो इलाज मिल जाता। वहीं काफी मरीज ऐसे भी थे जो सरकार के फैसले का समर्थन कर रहे थे।
अस्पताल व सरकार के खिलाफ नारेबाजी
max hospital
- फोटो : अमर उजाला
सुबह से ही मरीजों के परिजन परेशान थे। पहले अस्पताल के खिलाफ नारेबाजी की, बाद में सरकार के खिलाफ। उनका कहना था कि सरकार को निर्णय लेने के दौरान पहले यह सुनिश्चित करना था कि अस्पताल आने वाले मरीजों को किस प्रकार इलाज मिलेगा।
पुतला फूंका, राजनीति शुरू
अस्पताल में हंगामे के दौरान कुछ लोगों ने दिल्ली सरकार का पुतला फूंका। हालांकि कहा गया कि मरीजों व उनके परिवार के सदस्यों ने ऐसा किया। सवाल यह उठा कि आखिर मरीज पुतला लेकर वहां कैसे आए। मरीज इलाज करवाने आए थे, तो पुतला कहां से आया। बाद में पता चला कि कुछ लोग पहले से ही पुतला लेकर पहुंचे थे और वे एक राजनीति दल से थे।
मुख्यमंत्री से मदद की गुहार
अस्पताल में आने वाले मरीजों ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से गुहार लगाई कि उनके इलाज की उचित व्यवस्था की जाए। उनका कहना था कि अस्पताल प्रशासन व सरकार के बीच हो रही कार्रवाई में उनको इलाज से महरूम न रखा जाए।
हम कुछ नहीं कर सकते : अस्पताल प्रशासन
अदालत।
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मैक्स अस्पताल प्रशासन का कहना है कि हम जानते हैं कि मरीज परेशान हो रहे हैं, हमने कई लोगों को अप्वाइंटमेंट दी थी, लेकिन हम मजबूर हैं। दिल्ली सरकार ने हमें जो नोटिस भेजा है उसके तहत हम कुछ नहीं कर सकते।
उन्होंने बताया कि हमारे यहां रोज ओपीडी में लगभग 500 लोग आते हैं। सरकार के आदेश के बाद ओपीडी व इमरजेंसी को बंद कर दिया गया है। हालांकि अस्पताल में पहले से भर्ती किसी भी मरीज को परेशानी नहीं आएगी।
अदालत में याचिका दायर करेगा मैक्स
अस्पताल प्रशासन ने माना कि वे हर विकल्प पर काम कर रहे हैं। इनमें से एक विकल्प सरकार के आदेश को अदालत में चुनौती देना भी है। हम जल्द ही अदालत में याचिका दायर कर रहे हैं।