रोजे के अंतिम दौर की शुरुआत के साथ ही बाजार में मुस्लिम देशों के सामानों की रौनक बढ़ गई है। टोपी, इत्र से लेकर रमजान से जुड़ी चीजें बाजार में छाए हुए हैं। शहर के आम-ओ-खास सभी इनके दीवाने हैं। वहीं, तिलावत के लिए पाकिस्तानी पंच सूरे की मांग ज्यादा है।
दरअसल, तिलावत के नजरिए से रमजान अहम होता है। इस वजह से लोग रमजान में कई तरह की चीजों का इस्तेमाल करते हैं। रमजान के दूसरा असरा यानी बीसवें दिन से लोग मस्जिदों में एहतकाफ में बैठते हैं। इसमें बैठने के इच्छुक लोग खास तौर पर जनमाज, तस्बीह और इत्र खरीद रहे हैं।
बाजार में ईरान, अफगानिस्तान और तुर्की के जनमाज की अधिक मांग है। इसकी कीमत करीब 300 रुपये से 1500 रुपये तक है। अफगानिस्तान से आने वाले मुसल्ला कालीन पर तैयार की गई है। जबकि इसमें कोई कढ़ाई का काम नहीं है।
इरान और तुर्की से आने वाली जनमाज पर कढ़ाई की हुई है। मक्के मदीने की कढ़ाई के जरिए उकेरा गया है। इसमें महीन कढ़ाई की वजह से दोनों तरफ से इस्तेमाल किया जा सकता है। विदेशी इत्र खूब पसंद की जा रही है।
ईरान से आने वाली अल-तैबा, यूएई से आने वाली इत्र सुन्नत की मांग ज्यादा है। हार्ड इत्र बाजार में दस मिलीलीटर की कीमत 150 रुपये से 300 रुपये है।
मौलाना जान मोहम्मद कहते हैं कि तिलावत के नजरिए रमजान में कुरान बहुत अहम है। दुकानों और दूसरी जगहों पर काम करने वाले लोग रोजे के साथ कुरान की तिलावत की वजह से छोटी कुरान को रखना मुनासिब समझते हैं।
पाकिस्तानी पंच सूरा में कुरान की चुनिंदा आयतें हैं। उम्दा पेपर और तफसीर की वजह से लोग पसंद करते हैं। बाकी कोई फर्क नहीं होता है।
दुकानदार मोहम्मद तौहीर बताते हैं अभी सबसे ज्यादा मांग इत्र और टोपी की है। बंग्लादेशी, तुर्की और ईरानी टोपी लोग ज्यादा पसंद कर रहे हैं। दिल्ली या कोलकाता से आने वाली टोपी के मुकाबले यह महंगी है। इसकी शुरुआत ही 120 रुपये से होती है, लेकिन लोग खरीद रहे हैं।
एक अन्य दुकानदार सफी अहमद ने बताया कि रेडियम की बड़ी मोती वाला तस्बीह और अल्लाह-मोहम्मद लिखा हुआ तस्बीह सबसे ज्यादा पसंद किए जाते हैं। युवा इसे ज्यादा खरीद रहे हैं। ईशा के नमाज के वक्त आने वाले नमाजी के हाथों में देखा जा सकता है।